मंगलायतन विश्वविद्यालय में एआई के दौर में पब्लिक पॉलिसी व गवर्नेंस की चुनौतियों पर मंथन

-तकनीकी युग में पारदर्शी औरउत्तरदायीशासन व्यवस्था पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

अलीगढ़।आधुनिक युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती पैठ ने जहां विकास के नए द्वार खोले हैं, वहीं शासन व्यवस्था और सार्वजनिक नीतियों के समक्ष नई चुनौतियां भी पेश कीहैं।इन्हीं महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिएमंगलायतनविश्वविद्यालय के कंप्यूटर इंजीनियरिंग एंड एप्लीकेशन विभाग द्वारा?चैलेंजऑफ पब्लिक पॉलिसी एंडगवर्नेंसइनदएज ऑफएआई?विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन कियागया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीपप्रज्ज्वलनके साथहुआ।अतिथियों का स्वागतपुष्पगुच्छभेंट कर कियागया।कुलसचिव ब्रिगेडियर डा.समरवीरसिंह ने अतिथियों का परिचय कराते हुए वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इस विषय की प्रासंगिकता पर बलदिया।डीनएकेडमिकप्रो.अम्बरीषशर्मा ने सेमिनार के मूल विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा किएआईके इस युग में सार्वजनिक नीतियों को अधिक पारदर्शी,उत्तरदायीऔरतकनीक-संगतबनाने की तत्काल आवश्यकताहै।

मुख्यअतिथिसेवानिवृत्त आईएएसजीपीउपाध्याय ने प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था मेंएआईका समावेश सुशासन की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम हो सकताहै।उन्होंने जोर देकर कहा तकनीक का सही उपयोग ही सुशासन की असली कुंजी है, लेकिन इसके लिएनीति-निर्माताओंऔरप्रशासकोंको तकनीक के साथ-साथ नैतिक मूल्यों के प्रति भी सजग रहनाहोगा।वहीं,विशिष्ठ अतिथिइजलीएआईके संस्थापक प्रसून चौधरी नेएआईके व्यावहारिक पहलुओं पर तकनीकी जानकारी साझाकी।उन्होंने बताया कि किस प्रकारएआईजटिल प्रक्रियाओं को सरल और अधिक प्रभावी बना सकताहै।हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि डेटा सुरक्षा, गोपनीयता औरएआईकी नैतिकता जैसे मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना अनिवार्य है, ताकि इसके सामाजिक प्रभावों को संतुलित रखा जासके।

सेमिनार के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों नेएआईके भविष्य और इसके रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर कई सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाबदिया।दोपहर बाद एक विशेष वर्कशाॅप का भी आयोजन किया गया। जिसमें छात्रों कोएआईकी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दियागया।प्रो. राजीव शर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया।विभागाध्यक्ष डा. लव मित्तल ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अपने छात्रों को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करने हेतु प्रतिबद्धहै।अतिथियों को स्मृतिचिन्हभेंट कर सम्मानित कियागया।राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापनहुआ।कार्यक्रम मेंसमन्वयकडा. मनोजवार्ष्णेय, ललित किशोर, सत्यनारायण की भूमिकारही।इस अवसर पर संकाय सदस्य और विद्यार्थी उपस्थितरहे। संचालनडा. दीपिका बांदिल ने किया।