पत्रकार उत्पीड़न पर प्रशासन की चुप्पी ने खड़े किए बड़े सवाल

आदेश हवा में, जवाब नदारद! सिस्टम पर उठी उंगलियां

पत्रकार उत्पीड़न पर प्रशासन की चुप्पी ने खड़े किए बड़े सवाल

लखनऊ/हरदोई
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उत्तर प्रदेश में कानून और व्यवस्था की बात करने वाला प्रशासन अब खुद सवालों के घेरे में है। विधान परिषद के सख्त आदेश के बावजूद हरदोई में पत्रकारों के साथ हुई मारपीट और अभद्रता के मामले में अब तक कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई और यही लापरवाही अब पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बनकर खड़ी है।

⚖️ विधान परिषद का आदेश, फिर भी नहीं जागा प्रशासन

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के उप सचिव धर्मेंद्र कुमार मिश्र द्वारा 05 मार्च 2026 को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों में अपर मुख्य सचिव गृह, प्रमुख सचिव गृह और जिलाधिकारी हरदोई को मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया था।

👉 लेकिन हकीकत ये है कि 15 दिन बीतने के बाद भी कोई आख्या नहीं! यह सीधे-सीधे उच्चस्तरीय आदेशों की अनदेखी माना जा रहा है।

मामला हरदोई के बिलग्राम थाना क्षेत्र का है, जहां पत्रकार नेहा दीक्षित और राकेश कुमार (आरके, ब्यूरो चीफ-रफ्तार मीडिया) के साथ कथित तौर पर बिलग्राम सीओ और कोतवाली परिसर में मारपीट व अभद्र व्यवहार हुआ था।

👉 सवाल ये है:
जब मामला इतना गंभीर है, तो कार्रवाई की रफ्तार इतनी धीमी क्यों?

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