शासनादेशों को ठेंगा! चंदौली के बीएसए पर गंभीर सवाल सरकारी मंच से निजी संस्थान का खुला प्रचार

बीएसए की मौजूदगी में बच्चों को बांटा गया निजी स्कूल का ट्रैक सूट,परिषदीय विद्यालय बने क्या अब निजी संस्थानों के विज्ञापन केंद्र?

संवाददाता कार्तिकेय पाण्डेय

चकिया। प्रदेश सरकार जहां परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को निशुल्क, एकरूप और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं चंदौली जनपद में शासन की मंशा को पलीता लगाते हुए गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है।चकिया स्थित बीआरसी कार्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं के लिए ट्रैक सूट वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम तब विवादों में घिर गया जब बच्चों को सरकारी ट्रैक सूट के बजाय एक निजी शिक्षण संस्थान SRVS नाम अंकित ट्रैक सूट वितरित किया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह पूरा कार्यक्रम बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन कुमार यादव की मौजूदगी में सम्पन्न हुआ।कार्यक्रम के दौरान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह द्वारा निजी संस्थान का ट्रैक सूट बच्चों को पहनाया गया, लेकिन किसी भी स्तर पर आपत्ति दर्ज नहीं की गई।अब बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहाल अब निजी संस्थानों के ब्रांड एंबेसडर बनेंगे? क्या सरकारी मंच का उपयोग निजी संस्थानों के प्रचार-प्रसार के लिए किया जा सकता है?

शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश हैं कि परिषदीय विद्यालयों में किसी भी प्रकार का निजी प्रचार निषिद्ध है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी की मौन सहमति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।स्थानीय लोगों और शिक्षकों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि अगर बीएसए की मौजूदगी में ऐसा हो सकता है, तो विभागीय नियमों का क्या महत्व रह जाता है।यह मामला न केवल शासनादेशों की अवहेलना का है, बल्कि सरकारी व्यवस्था की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इस पूरे प्रकरण पर क्या संज्ञान लेते हैं या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।