हरदोई में यूजीसी कानून के विरोध में सैकड़ों लोगों का प्रदर्शन, डीएम कार्यालय का किया घेराव, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा

हरदोई। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कानून 2026 को रद्द कराने की मांग को लेकर गुरूवार को सवर्ण समाज के अधिवक्ताओं सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में लोग जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और यूजीसी कानून के विरोध में नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी रोलबैक करो और डीएम साहब बाहर आओ जैसे नारे लगाए, जिससे कुछ समय के लिए प्रशासनिक परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा गया। ज्ञापन में संगठनों ने आरोप लगाया कि यूजीसी कानून उच्च शिक्षा के क्षेत्र में समरसता और एकता के लिए खतरा बन रहा है। उनका कहना है कि इस कानून के प्रावधान भेदभाव और असमानता को बढ़ावा देते हैं तथा छात्रों और शिक्षकों के मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन करता है, जो नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और जीवन का अधिकार प्रदान करते हैं। इसके साथ ही झूठी शिकायतों पर किसी प्रकार के दंड का प्रावधान न होने को भी उन्होंने गंभीर चिंता का विषय बताया, जिससे कानून के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है।
संगठनों का कहना था कि उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में इस अधिसूचना के लागू होने से विश्वविद्यालय परिसरों में भय, असंतोष और असमानता का माहौल बन रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सामान्य वर्ग की आबादी देश की बड़ी जनसंख्या का हिस्सा है और शिक्षा, प्रशासन व आर्थिक विकास में उसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है, इसके बावजूद उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन, पूर्व सैनिक वेलफेयर फाउंडेशन और हिंदू शक्ति संगठन के पदाधिकारियों ने एक स्वर में मांग की कि यूजीसी कानून को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। राजीव सिंह, अरविंद सिंह, राकेश सिंह, अनिल सिंह आदि ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से आंदोलन को और तेज किया जाएगा।