पश्चिम रेलवे में पहली बार वटवा विद्युत इंजन शेड को मिला प्रतिष्ठित ‘हरित स्वर्ण’ सम्मान, पर्यावरण संरक्षण में बनाई नई पहचान

पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल स्थित वटवा विद्युत इंजन शेड ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वटवा विद्युत इंजन शेड को पहली बार प्रतिष्ठित संस्था भारतीय उद्योग परिसंघ के हरित व्यापार केंद्र द्वारा हरित स्वर्ण श्रेणी सम्मान प्रदान किया गया है। यह सम्मान नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होने वाले 15वें हरित सम्मेलन 2026 में दिया जाएगा। इस उपलब्धि के साथ वटवा शेड देश के अग्रणी पर्यावरण अनुकूल और सतत संस्थानों की सूची में शामिल हो गया है।

इस अवसर पर अहमदाबाद मंडल के मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे अहमदाबाद मंडल और पश्चिम रेलवे के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान अधिकारियों और कर्मचारियों की पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और सतत विकास के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता का परिणाम है। वटवा शेड ने नवाचार, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और हरित तकनीकों को अपनाकर यह सिद्ध किया है कि उत्कृष्ट संचालन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय रेल वर्ष 2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर कार्य कर रही है और यह उपलब्धि उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वटवा शेड की यह सफलता भारतीय रेल की अन्य इकाइयों के लिए प्रेरणा बनेगी तथा सुरक्षित, स्वच्छ, हरित और सतत भविष्य के निर्माण में सहायक होगी। पश्चिम रेलवे में यह पहली बार है जब किसी विद्युत इंजन शेड को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है।

ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में वटवा विद्युत इंजन शेड ने डीजल आधारित संचालन को पूरी तरह समाप्त करते हुए वर्ष 2022-23 में 1 करोड़ 88 लाख लीटर से अधिक डीजल की खपत को शून्य कर दिया। इससे प्रत्यक्ष कार्बन उत्सर्जन में लगभग 100 प्रतिशत की कमी आई। प्राकृतिक प्रकाश के अधिकतम उपयोग के लिए विशेष प्रकाश व्यवस्था स्थापित की गई। इसके अलावा ऊर्जा बचाने वाले पांच सितारा श्रेणी के पंखे, साधारण बल्बों के स्थान पर एलईडी प्रकाश व्यवस्था, सेंसर आधारित नियंत्रण प्रणाली और स्वचालित समय नियंत्रक तकनीक अपनाकर बिजली की बड़ी बचत सुनिश्चित की गई।

जल संरक्षण की दिशा में भी वटवा शेड ने सराहनीय कार्य किया है। वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण प्रणाली के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख लीटर से अधिक जल पुनर्भरण की क्षमता विकसित की गई है। इसके अलावा जलरहित मूत्रालय, इंजन प्रणाली में जल उपयोग सुधार और अपशिष्ट जल प्रबंधन के माध्यम से ताजे पानी की खपत लगातार कम की गई है।

अहमदाबाद मंडल में लगभग 1863 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनसे हर वर्ष लगभग 24 लाख इकाई स्वच्छ बिजली का उत्पादन हो रहा है। वटवा शेड के लिए अलग से सौर ऊर्जा परियोजना भी प्रस्तावित है, जिससे भारतीय रेल के वर्ष 2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को और मजबूती मिलेगी।

इसके अलावा अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण, हरित आपूर्ति व्यवस्था, एकल उपयोग प्लास्टिक पर रोक, अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से कचरा निस्तारण और पुर्जों के पुनः उपयोग जैसी पहलों से हर वर्ष लगभग 38 लाख रुपये की बचत सुनिश्चित की गई है। शेड द्वारा विकसित कई तकनीकी नवाचारों को रेलवे अनुसंधान संस्थान ने अपनाया है तथा रेलवे बोर्ड की प्रतियोगिता में भी प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।

वटवा विद्युत इंजन शेड को मिला यह हरित स्वर्ण सम्मान वहां कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत, प्रतिबद्धता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण का परिणाम है। यह उपलब्धि पश्चिम रेलवे और भारतीय रेल की सतत विकास, हरित तकनीक और वर्ष 2030 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। यह भारतीय रेल के स्वच्छ, आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल भविष्य की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।