निजी सोलर कंपनी की मनमानी से भड़का विवाद, किसानों का विरोध, आंदोलन की चेतावनी

श्रीगंगानगर के लालगढ़ जाटान क्षेत्र में निजी सोलर कंपनी द्वारा किसानों के खेतों में जबरन खंभे गाड़ने और तारें खींचने का मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। लगातार हो रही घटनाओं से किसानों में भय और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

मामले की शुरुआत तब हुई जब पटवारी द्वारा कंपनी को स्पष्ट रूप से कार्य रोकने के निर्देश दिए गए थे लेकिन कंपनी ने आदेशों की अवहेलना करते हुए बुधवार रात से काम जारी रखा और खेतों में खंभों पर तारें खींच दी। किसानों का आरोप है कि लगाए गए खंभों की गुणवत्ता भी खराब है और कई जगह खंभे टूटते नजर आ रहे है जिससे किसानों में डर का माहौल बन गया है। किसानों का कहना है कि तेज हवा चलने पर ये खंभे गिर सकते है, जिससे जान-माल का नुकसान हो सकता है।

कंपनी अभी भी काम जारी रखे हुये है। परेशान किसानों ने बीती रात 11 बजे लालगढ़ पुलिस को सूचना दी लेकिन पुलिस देर रात करीब 2 बजे मौके पर पहुंची और बिना ठोस कार्रवाई के कुछ ही समय में लौट गई। इससे किसानों में नाराजगी और बढ़ गई।

उसी दौरान किसान रामचंद्र के खेत में बिना अनुमति खंभे गाड़ दिए गए जिसे सुबह किसान ने ट्रैक्टर की मदद से उखाड़ दिया। इसके बाद मामला और तूल पकड़ गया। सोलर कंपनी ने किसान पर गाली-गलौज का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवा दिया वहीं किसान ने भी कंपनी मालिक कमल कुमार के खिलाफ अपनी जमीन में अतिक्रमण का मामला दर्ज करवाया है।

विवाद बढ़ने पर किसान पूर्व विधायक जगदीश जांगिड़ के पास पहुंचे और अपनी समस्या रखी। इसके बाद किसानों ने सांकेतिक धरने का ऐलान करते हुए चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गई तो अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार रजनी चौधरी मौके पर पहुंची और किसानों की पीड़ा सुनी। उन्होंने आश्वासन दिया कि कंपनी का कार्य फिलहाल रोका जाएगा और मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम में कामरेड देवी दयाल चावला ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। वहीं पूर्व विधायक जगदीश जांगिड़ ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो लालगढ़ जाटान में बड़ा अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

तहसीलदार के आश्वासन के बाद किसानों में कुछ राहत जरूर देखने को मिली है लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुये है।