गंगानगर की सड़कों पर महासंग्राम, कलेक्ट्रेट पर उमड़ा जनशक्ति का सैलाब

श्रीगंगानगर की सड़कों ने आज वह ऐतिहासिक मंजर देखा जिसने सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी। वार्ड नंबर 34 और 1 एफ छोटी में प्रस्तावित कचरा प्लांट के खिलाफ पिछले 10 दिनों से सुलग रही जन-आक्रोश की चिंगारी आज एक प्रचंड ज्वालामुखी बनकर जिला कलेक्ट्रेट पर फूट पड़ी। यूआईटी द्वारा गुपचुप तरीके से जारी की गई एनओसी और जनता की सेहत के साथ किए जा रहे प्रशासनिक खिलवाड़ के खिलाफ जब भाजपा नेता एंव समाजसेवी अशोक चांडक ने सत्तासीन अपनी ही पार्टी के खिलाफ आंदोलन की कमान संभाली तो पूरा शहर मानो उनके एक आह्वान पर सड़कों पर उतर आया। महाराजा गंगासिंह चौक से शुरू हुआ यह जन-सैलाब जब कलेक्ट्रेट पहुँचा तो गगनभेदी नारों और "इंकलाब" की गूंज ने यह साफ कर दिया कि अब जनता अपने हक हकुकों की लड़ाई के लिए आर-पार के मूड में है। हजारों की इस भीड़ के बीच आंदोलन की धुरी बने भाजपा नेता अशोक चांडक के प्रति लोगों का विश्वास और जोश देखने लायक था जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी।

इस पूरे महा आंदोलन के सूत्रधार और जनता की उम्मीदों के प्रतीक अशोक चांडक ने जब कलेक्ट्रेट के घेराव के बीच जिला कलेक्टर डॉ. अमित यादव के साथ वार्ता की तो उनका तेवर किसी जन-नायक से कम नहीं था। इस निर्णायक वार्ता के दौरान अशोक चांडक ने बेहद तार्किक और बेबाक लहजे में प्रशासन को चेताया कि 10 हजार से अधिक आबादी वाली रिहायशी कॉलोनियों के बीच कचरे का अंबार लगाने की साजिश को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चांडक ने यूआईटी द्वारा रातों-रात चोरी-छिपे किए गए जमीन हस्तांतरण और जल्दबाजी में जारी की गई एनओसी की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए अधिकारियों को दो-टूक कह दिया कि प्रशासन का काम जनता को राहत देना है, आफत देना नहीं। उनके प्रखर नेतृत्व और तर्कों के सामने प्रशासन रक्षात्मक मुद्रा में नजर आया और अधिकारियों को यह अहसास हो गया कि अब जनता को गुमराह करना नामुमकिन है।

अशोक चांडक के इस प्रखर और निस्वार्थ नेतृत्व का ही असर था कि कलेक्ट्रेट के बाहर खड़ा हर नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा था। मंच से दहाड़ते हुए चांडक ने घोषणा की कि एक क्षेत्र की समस्या का समाधान दूसरे क्षेत्र को गंदगी के दलदल में धकेल कर करना कतई न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने प्रशासन को खुली चेतावनी दी कि जब तक इस जनविरोधी फैसले को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता यह संघर्ष जारी रहते हुये और उग्र होगा। आज के इस सफल शक्ति प्रदर्शन और प्रभावशाली वार्ता ने यह साबित कर दिया कि जब नेतृत्व अशोक चांडक जैसा निडर और अनुभवी हो तो बड़ी से बड़ी सत्ता को भी जनशक्ति के आगे घुटने टेकने पड़ते हैं। 15 अप्रैल को हाईकोर्ट की सुनवाई से पहले आज के इस महासंग्राम ने न केवल जयपुर तक गूंज पहुँचा दी बल्कि जनता की अदालत का अंतिम फैसला भी सुना दिया है।