बिना डिग्री ‘किडनी विशेषज्ञ बन इलाज का आरोप हजारों रुपए की ठगी करने का आरोप 

बिना डिग्री ?किडनी विशेषज्ञ बन इलाज का आरोप हजारों रुपए की ठगी करने का आरोप

मुरादाबाद। जिले के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है जिसमें एक निजी अस्पताल पर मरीजों को गुमराह कर अवैध वसूली और गलत इलाज करने के आरोप लगे हैं पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने बताया कि उसकी 58 वर्षीय बहन की तबीयत 20 मार्च 2026 को अचानक खराब हो गई थी। इसके बाद उसे तत्काल कांठ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में मौजूद डॉक्टर ने खुद को किडनी रोग विशेषज्ञ (नेफ्रोलॉजिस्ट) बताते हुए इलाज शुरू किया और मरीज को भर्ती रखने की सलाह दी परिवार का आरोप है कि डॉक्टर की सलाह पर मरीज का इलाज जारी रखा गया और इस दौरान करीब 11 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रखा गया। इस दौरान करीब 2.5 लाख रुपये खर्च करा दिए गए, लेकिन मरीज की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ आरोप है कि डॉक्टर के निर्देश पर मरीज की 8 बार डायलिसिस कराई गई, जिससे परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट गया शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित डॉक्टर के पास किडनी रोग विशेषज्ञ होने की कोई मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है, फिर भी वह खुद को नेफ्रोलॉजिस्ट बताकर मरीजों का इलाज कर रहा है इतना ही नहीं अस्पताल के मैनेजमेंट पर भी इस पूरे खेल में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार डायलिसिस की फीस 1500 से 3500 रुपये के बीच होनी चाहिए, लेकिन अस्पताल में एक डायलिसिस के नाम पर 15 हजार रुपये तक वसूले गए। इसे लेकर जब परिवार ने आपत्ति जताई तो उन्हें डराया-धमकाया गया और शिकायत न करने की चेतावनी दी गई शिकायतकर्ता का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन का प्रभावशाली लोगों से संपर्क होने के कारण कार्रवाई से बचने की कोशिश की जा रही है साथ ही परिवार को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई पीड़ित ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए संबंधित डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी अवैध वसूली और मरीज की जान से खिलवाड़ जैसे गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाता है।