स्क्रैप बिक्री से सेंट्रल रेलवे ने कमाए 459.52 करोड़ रुपये, पिछले 2 साल में सबसे बड़ी उपलब्धि

मुंबई। सेंट्रल रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्क्रैप बिक्री के माध्यम से 459.52 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व अर्जित कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह आंकड़ा बीते दो वर्षों में सबसे बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। सेंट्रल रेलवे ने इस उपलब्धि के साथ रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित 450 करोड़ रुपये के लक्ष्य को भी पार कर लिया है। रेलवे ने ?जीरो स्क्रैप मिशन? के तहत स्क्रैप को राजस्व में बदलने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर साबित किया है।

रेलवे प्रशासन के अनुसार, यह सफलता विभिन्न श्रेणियों के स्क्रैप और अनुपयोगी सामग्री के सुनियोजित निस्तारण से मिली है। इस दौरान रेल स्थायी पथ से संबंधित 47,502 मीट्रिक टन स्क्रैप, 31,298 मीट्रिक टन फेरस स्क्रैप, 3,616 मीट्रिक टन नॉन-फेरस स्क्रैप, 2,65,625 पुराने स्लीपर, तथा 50 लोकोमोटिव, 78 कोच और 137 वैगन का निस्तारण किया गया।

सेंट्रल रेलवे के स्टोर्स विभाग ने विशेष अभियान चलाकर दूर-दराज और अलग-अलग स्थानों पर पड़े स्क्रैप की पहचान कर उसका निपटान किया। इसमें कुर्ला कटिंग यार्ड, ट्रैक्शन मशीन वर्कशॉप (नासिक), परेल वर्कशॉप, मनमाड वर्कशॉप सहित सेंट्रल रेलवे के सभी पांच मंडलों में समन्वित प्रयास किए गए, जिससे स्क्रैप बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

स्क्रैप बिक्री के मामले में भुसावल मंडल सबसे आगे रहा, जिसने 105.39 करोड़ रुपये की सर्वाधिक स्क्रैप बिक्री दर्ज की। इसके बाद माटुंगा वर्कशॉप ने 68.39 करोड़ रुपये, नागपुर मंडल ने 64.02 करोड़ रुपये, मुंबई मंडल ने 55.49 करोड़ रुपये और पुणे मंडल ने 50 करोड़ रुपये की स्क्रैप बिक्री कर महत्वपूर्ण योगदान दिया।

रेलवे ने केवल स्क्रैप बिक्री ही नहीं बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया है। इसी कड़ी में एक रोटाटेक प्रिंटिंग मशीन, जो उपयोग में नहीं थी लेकिन कार्यशील स्थिति में थी, उसे स्क्रैप घोषित करने के बजाय 8.75 करोड़ रुपये के मूल्य पर नासिक प्रिंटिंग प्रेस को स्थानांतरित किया गया। यह कदम रेलवे की संसाधन प्रबंधन नीति और आर्थिक विवेक को दर्शाता है।

सेंट्रल रेलवे का कहना है कि यह उपलब्धि ?जीरो स्क्रैप मिशन? को मजबूत करने के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन, संचालन क्षमता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।