विकास का ये कैसा मॉडल: बस हेलमेट पहना जरूरी,  रेंगते ट्रैफिक को ना सुधारना जरूरी..?

विकास का ये कैसा मॉडल: बस हेलमेट पहना जरूरी,�
रेंगते ट्रैफिक को ना सुधारना जरूरी..?

✍️डी.डी शुक्ला

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जनपद के नेताओं को थोड़ा दोपहिया वाहनों पर हेलमेट,कभी बिना लगाए भी आमजन-सा घूमना चाहिए वह भी परिवार के साथ और विकास का जायजा लेना चाहिए। कभी ई-रिक्शा, कभी कचरा गाड़ी, कभी सिटी बस में बैठना, बस फोटो खिंचवाने, रीलबाजी करने तक ही सीमित रहेंगे तो यथार्थ कैसे समझेंगे। जरा मैदान में उत्तरो! सरलता का डिंडोरा मत पीटो। ये पब्लिक है सब जानती है। ये सरलता दिखाने के फोटो, तब फोटो ही रह जाते हैं, जैसे आप बड़ी बड़ी स्क्रीनों पर विकास के मॉडल दिखाते हैं। वैसे ही जैसे बालपन में बच्चे जंगलबुक मोगली देखते थे और उस दुनिया में जाने की सोचते थे।�

✅आप भी अब जनता को वैसा ही भ्रम पैदा करने में माहिर हो गए हो। हरदोई की जनता मान बैठी है जो जितनी बड़ी ड्रामा कंपनी चलाता है, उतना बड़ा नेता बनता है। क्या आप इस मान्यता को चरितार्थ कर रहे है। नहीं तो आमजन बनकर देख लीजिए। जब कोई विकास की अव्यवस्था के कारण कट मारते हुए आपको गाली बक कर जाएगा या आप किसी सिटी बस वाले या स्कूल बस वाले को गाली बकेंगे तब अपने ही विकास को समझ पाएंगे।

🔳हेलमेट पहनाना भी जरूरी है। माना कि सुरक्षा की दृष्टि से हेलमेट जरूरी है पर क्या सुरक्षा की दृष्टि की खोज सिर्फ हेलमेट में ही देखना कहा तक तार्किक है। रेंगते ट्रैफिक को सुधारना भी उतना ही जरूरी है। ट्रैफिक कैसे सुधारा जाए, इसमें बल लगाए। विकास के नाम पर बनाने और तोड़ने पर नहीं वास्तविक विकास में बल लगाएं। आमजन सुगमता से निकलने के लिए चार चार रास्ते खोजते है पर उनके विकास का रास्ता बड़ी-बड़ी स्क्रीनों में खो जाता है।�

अभी मॉडल तो स्क्रीनों में ही दम तोड़ रहे है। सिर्फ बाजारों में मालाओं से स्वागत करवाने की आदत बदलो। तब अपने आप आमजन द्वारा फूलों की वर्षा होगी न कि अपने ही कार्यकर्ताओं द्वारा। स्मार्ट तो छोड़ो, विकसित हरदोई बनाओ।�

#MYogiAdityanath �#नगरनिकाय�