बेलगाम हुए भाजपा पार्षद,जनता की समस्याओं से दूर

बेलगाम हुए भाजपा पार्षद,जनता की समस्याओं से दूर

जनता के बीच वसूलीबाज कहलाने लगे भाजपाई पार्षद, ऐसे कभी न थे शहर में पार्षदों के हाल

अब भी वक्त है,संभल जाएं संगठन व सरकार !

लगाम लगाएं, निगरानी बढ़ाएं !!

पार्टी के प्रति कोई निष्ठा नहीं बची,विधायक के कहने पर ही आते-जाते हैं दल के कार्यक्रम में__

#हरदोई
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निगरानी के अभाव में भाजपा संगठन व सरकार को पता है,पार्टी पार्षद अपने अपने इलाके में क्या कर रहे हैं? इन पार्षदों की जनता के बीच इमेज क्या है? हरदोई में अब भाजपा के पार्षद क्या कहलाने लगे हैं, पता है? इक्का-दुक्का पार्षद ही होंगे,जो पूरे मनोयोग से पार्षदी का धर्म निभा रहे हों। शेष तो बस वसूली में लगे हुए हैं। इसलिए हरदोई के भाजपाई पार्षदों को प्रहलाद नगरी में 'वसूलीबाज' कहा जाने लगा है। ये उत्तर प्रदेश सरकार को खबर है? कभी संगठन व सरकार ने इसकी जानकारी लेने की कोई गुपचुप कोशिशें की कि इन दिनों पार्टी पार्षद जनता की समस्याओं के निराकरण से हटकर किन क्रियाकलापों में लिप्त हैं? या संगठन व सरकार भी आंख देखे मक्खी निगलने को मजबूर हो चले हैं?

भाजपा के पार्षद निगरानी के अभाव में पूरी तरह बेलगाम हो गए हैं। लिहाजा इनकी तमाम निष्ठाएं अपने-अपने विधायक के प्रति ही हैं। वे ना कर दें तो कार्यक्रम में झांकते भी नहीं। भले ही वह कार्यक्रम पार्टी संगठन का हो या फिर नगर पालिका व नगर पंचायतों का या सांसद, मंत्री का। क्या राज्य सरकार को ये खबर है कि हरदोई का पार्षद अब पार्टी का नहीं, विधायक की निजी मिल्कियत में तब्दील हो गया है। सीधे शब्दों में विधायक का जरखरीद गुलाम ?

पार्षद क्या जनता के काम कर रहे हैं? सड़क,गटर, नाली, बिजली के खंभे, पानी, ड्रेनेज, डामरीकरण, मुरम-गिट्टी से गड्ढे भरना, कच्ची सड़क आदि। ये काम हैं क्या पार्षदों के हिस्से में। अब हरदोई कोई पुराना शहर तो नहीं रहा कि इन सब माननीयों को इन समस्याओं से जूझना पड़े।

__फिर अलसुबह से देर रात तक पार्षद कर क्या रहे हैं? ये जानने की कोशिश तो करे भाजपा का प्रदेश नेतृत्व व योगी सरकार। पार्षदों पर न लखनऊ से नजर है, न इन्हें हरदोई संगठन का कोई डर। न अब हरदोई में ऐसे कोई वरिष्ठ नेता की धमक या चमक बची। शहर के जो दमदार नेता हैं, उनके हाथ बांध दिए गए। इसलिए पार्षदों की जमकर मनमर्जी व अवैध वसूली चल रही है। हालात इस कदर खराब हैं कि पार्षद बिल्डर ही नहीं, ठेले, रेहड़ी, पटरी पर रोज कमाने-खाने वालों को भी नहीं छोड़ रहे। इन गरीबों तक से वसूली हो रही हैं ।लिहाजा नगर पालिका व नगर पंचायतों द्वारा अनेक अतिक्रमण मुहिम के बाद भी सड़कों पर जबरदस्त कब्जे बरकरार हैं और ट्रैफिक बदहाल।

अभी भी वक्त है, सरकार व संगठन संभल जाएं। इन बेलगाम पार्षदों पर वक्त रहते लगाम लगाएं। इनकी निगरानी बढ़ाएं कि ये अपने वार्ड में किस तरह के अवैध काम या वैध काम में भी अवैध वसूली कर रहे हैं।

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