श्री रघुनाथपीर धुणी मेला विवाद पहुंचा हाईकोर्ट मेला होगा या निःशुल्क नेत्र जांच शिविर –: फैसला आज संभव

पाली | मेघवाल समाज के आराध्य देव एवं संत शिरोमणि श्री रघुनाथपीर की चमत्कारी धुणी, जो नाडोल के समीप स्थित है, उससे जुड़े वार्षिक मेले को लेकर उपजा विवाद अब राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के चलते समाज के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इस वर्ष मेला आयोजित होगा या फिर निःशुल्क नेत्र जांच एवं ऑपरेशन शिविर।

क्या है पूरा विवाद -:

विवाद की जड़ वर्ष 1998 से जुड़ी है, जब भंडारे के दौरान गृहस्थ पीर परंपरा को लेकर मतभेद उत्पन्न हुए। उस समय सादड़ी परगने द्वारा नकलंग श्री बालकदास को पीर बिठाए जाने के बाद समाज दो धड़ों में बंट गया। एक पक्ष ने देवस्थान विभाग जोधपुर में अखिल राजस्थान मेघवाल समाज श्री रघुनाथपीर धुणी आश्रम का पंजीयन करवाया, जबकि गृहस्थ समर्थक दूसरे पक्ष ने आयुक्त देवस्थान, उदयपुर से इस ट्रस्ट का पंजीयन 13 मई 1989 को निरस्त करवा दिया।

कौन सा ट्रस्ट वैध -:

दोनों पक्षों को सुनने के बाद देवस्थान विभाग जोधपुर ने 22 जुलाई 1991 को श्री रघुनाथपीर धुणी एवं मेघवाल समाज महासभा विकास न्यास को वैध घोषित किया। तभी से धुणी का संपूर्ण प्रबंधन इसी न्यास द्वारा किया जा रहा है।

चुनाव और आपत्ति -:

न्यास द्वारा वर्ष 2024?26 के लिए विधिवत चुनाव करवाकर प्रपत्र-8 देवस्थान विभाग जोधपुर में प्रस्तुत किया गया। इस पर निरस्त ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में वदाराम द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसे विभाग ने खारिज करते हुए प्रपत्र-8 स्वीकार किया और न्यास को वर्ष 2026 के चुनाव एवं गांव निर्धारण का अधिकार प्रदान किया।

न्यास के विकास कार्य

वैधता मिलने के बाद न्यास ने समाज में एकता, एक मेला?एक ट्रस्ट के सिद्धांत को लेकर कार्य शुरू किए। लंबे समय से बंद पड़े निर्माण कार्य को पूर्ण करवाया गया, चमत्कारी दीवार को सुरक्षित किया गया तथा धुणी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के लिए कंटीली झाड़ियों व अंग्रेजी बबूल को हटाया जा रहा है।

एकता के लिए आम सभाएं

न्यास द्वारा 8 अगस्त 2025 एवं 18 जनवरी 2026 को विशाल आम सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें हजारों लोगों ने भाग लिया। इन सभाओं में 15?15 दिन के अंतराल में लगने वाले दो मेलों को बंद कर एक मेला एवं एक ट्रस्ट के समर्थन का प्रस्ताव पारित किया गया।

5?6 फरवरी मेले का विरोध

आम सभा में 5?6 फरवरी को प्रस्तावित मेले का हाथ उठाकर विरोध किया गया। जिला व उपखंड प्रशासन ने मध्यस्थता करते हुए मार्च माह में मेला आयोजित करने का सुझाव दिया, जबकि समाज ने श्री रघुनाथपीर की समाधि अथवा पीर पदवी दिवस पर मेला घोषित करने का पुरजोर समर्थन किया।

एसडीएम द्वारा बैठक पर रोक

निरस्त ट्रस्ट के वदाराम द्वारा 5?6 फरवरी को बैठक आयोजित करने की सूचना पर उपखंड अधिकारी (SDM) ने रोक लगा दी।

हालिया विवाद -:

न्यास का आरोप है कि प्रबंधन सुधार के तहत धुणी परिसर में किसी भी कार्यक्रम के लिए अनुमति अनिवार्य की गई, जबकि निरस्त ट्रस्ट बिना न्यास की एनओसी के अवैध चंदा वसूली, निरस्त ट्रस्ट का संचालन और अवैध पद धारण कर गतिविधियां कर रहा है।

हाईकोर्ट में मामला -:

निरस्त ट्रस्ट के वदाराम व सखाराम द्वारा पहले मेले को लेकर सिविल रिट दायर की गई, जिसमें राहत नहीं मिलने पर मेले की सुरक्षा के नाम पर आपराधिक रिट दायर कर तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया गया है। इस पर एकतरफा आदेश प्राप्त किया गया।

न्यास की ओर से इसे न्यायिक प्रक्रिया पर कुठाराघात बताते हुए उच्च न्यायालय में लिखित आपत्ति व अपील दायर की गई, जिस पर कोर्ट ने सरकार एवं संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर सुनवाई आज तय की है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही यह तय होगा कि मेला होगा या नहीं।

समाज में असमंजस :-�

हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस मुस्तैद है और प्रशासन आदेश की पालना में जुटा हुआ है। ऐसे में समाज में भारी असंतोष देखा जा रहा है। न्यास द्वारा प्रस्तावित निःशुल्क नेत्र जांच एवं ऑपरेशन शिविर और मेला आयोजन को लेकर लोग धर्मसंकट में हैं। समाज के कई लोगों का कहना है कि जनकल्याणकारी योजनाओं की बजाय मेले की जिद समाजहित में नहीं है।