एटा: कृषि विज्ञान केन्द्र अवागढ पर रबी एवं विश्व मृदा दिवस पर तिलहन मेला कार्यक्रम का आयोजन।

*एटा: कृषि विज्ञान केन्द्र अवागढ पर रबी एवं विश्व मृदा दिवस पर तिलहन मेला कार्यक्रम का आयोजन।*

*संवाददाता: रमेश जादौन सिटी अपडेट न्यूज़।*

अवागढ/एटा:

जनपद एटा के कृषि विज्ञान केन्द्र अवागढ़ पर तिलहन मेला रबी एवं विश्व मृदा दिवस कार्यक्रम मनाया गया। इस कार्यक्रम में एटा जिले के लगभग 300 किसानों ने प्रतिभाग किया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि चेयरमैन अवागढ, महेश पाल सिंह ने मिट्टी जांच कराकर किसानों को तिलहन फसलों सरसों, मूॅगफली, सोयाबीन को करने पर ज्यादा जोर दिया तथा समय- समय पर आकर वैज्ञानिकों को सलाह एवं प्रशिक्षण लेने को कहा गया। विशिष्ठ अतिथि संयुक्त निदेशक कृषि, श्री उप श्रवण कुमार जी ने किसानों को तिलहन की खेती के वैज्ञानिक तरीकों, उन्नत बीजों, खाद और उपयुक्त मिट्टी के बारे में जानकारी दी जिससे किसानों की आर्थिक उन्नति हो सके। किसान अब गेहूॅ की तुलना में सरसों की खेती को ज्यादा पसंद कर रहे हैं क्योंकि इसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा हो रहा है। मिट्टी की उर्वरता और तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए जिंक, सल्फर और जैविक खाद के प्रयोग पर ज्यादा जोर दे। केन्द्र और राज्य सरकार भारत को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरसों की खेती को बढ़ावा दे रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपकृषि निदेशक एटा सुमित पटेल ने किया साथ ही प्राकृतिक खेती करने पर जोर दिया। जिला कृषि अघिकारी डाॅ मनवीर सिंह ने किसान भाई अपने खेतों की मिट्टी की जांच समय-समय पर कराते रहे। मिट्टी और पौधों के साथ काम करते समय सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां हो सकती है। इसलिए किसान भाई हाथों पर दस्ताने पहनना, मास्क का प्रयोग करे एवं साफ-सुधरे उपकरणों का इस्तेमाल करें। कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं हैड़ डा0 मनीष सिंह ने किसानों को मिट्टी के महत्व के बारे में जागरूक करना क्योंकि बदलते समय मिट्टी लगातार कीटनाशक रासायनिक खाद का उपयोग किया जा रहा है। जिससे मिट्टी की उर्वरक शक्ति कम हो रही है। किसान भाईयों को प्राकृतिक खेती करने पर ज्यादा जोर दिया। वैज्ञानिक डा0 एस0के0 सिंह ने सरसों एवं गेहूॅ में तापमान कम होने पर पाले की सम्भावना बढ़ जाती है। सरसों के बचाव के लिए एक हल्की सिचाई किसान भाई कर दें। गेहूॅ के खरपतवार नियंत्रण के लिए 40 दिनों के बाद क्लोडिनाफाॅप एवं मेट्राब्यूजिन का स्प्रे कर दें जिससे खरपतवार से बचाव होगा। दीप्ती सिंह कृषि प्रसार ने किसानों की दोगुनी आय के लिए किसान भाई खेती के साथ-साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन करें एवं मशरूम उत्पादन की विस्तृत जानकारी दी। विष्णु सिंह, मृदा वैज्ञानिक ने रासायनिक खेती के कारण मृदा बंजर हो रही है। भूमि को सुधारने के लिए किसान भाई गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद का प्रयोग करें जिससे जैविक कार्बन की बढ़ोत्तरी होगी साथ-साथ मृदा की उपजाऊ क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी। इफको प्रभारी दीपक मंडल ने खेती में नेनों यूरिया, नेनों डी.ए.पी. का भी प्रयोग करें। वैज्ञानिक शिव प्रताप सिंह, उद्यान विभाग ने ज्यादा से ज्यादा सब्जियों की पैदावार करने की सलाह दी। इस बीच लाखन सिंह, राजेन्द्र सिंह, बलवीर सिंह, इन्द्रपाल एवं प्रेमपाल 05 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण किये। इस कार्यक्रम में जैवेश, पुष्पेन्द्र, बबलू, सचिन आदि उपस्थित रहे।


रिपोर्ट: रमेश जादौन एटा।