मिशन रफ्तार को मिली बड़ी कामयाबी, दिल्ली-मुंबई हाई-स्पीड कॉरिडोर की तकनीकी तैयारी तेज

मिशन रफ्तार को मिली बड़ी कामयाबी, दिल्ली-मुंबई हाई-स्पीड कॉरिडोर की तकनीकी तैयारी तेज

छाता ट्रैक्शन सब-स्टेशन हुआ सक्रिय, सितंबर के अंत तक हाई-स्पीड परीक्षण की तैयारी

दिल्ली-मुंबई हाई-स्पीड कॉरिडोर को गति देने के लिए उत्तर मध्य रेलवे ने मिशन रफ्तार के तहत एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। आगरा मंडल के छाता ट्रैक्शन सब-स्टेशन को 7 सितंबर 2026 को सफलतापूर्वक फॉरवर्ड चार्जिंग के साथ सक्रिय कर दिया गया। रेलवे के अनुसार यह उपलब्धि हाई-स्पीड रेल परिचालन के लिए आवश्यक विद्युत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मिशन रफ्तार के तहत दिल्ली और मुंबई के बीच यात्रा समय को 12 घंटे के भीतर लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए रेलखंड को 160 से 200 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। परियोजना के तहत सिविल इंजीनियरिंग, विद्युत कर्षण, सिग्नल एवं दूरसंचार तथा यांत्रिक विभागों में व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

पलवल-मथुरा खंड बनेगा महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार

उत्तर मध्य रेलवे के अंतर्गत पलवल-मथुरा खंड करीब 84 मार्ग किलोमीटर और 336 ट्रैक किलोमीटर का है। इसे दिल्ली-मुंबई हाई-स्पीड कॉरिडोर के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस खंड में आधारभूत ढांचे को हाई-स्पीड परिचालन के अनुरूप तैयार करने का कार्य तेजी से जारी है।

रेलवे के अनुसार हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी से दिल्ली-मुंबई के बीच आवागमन बेहतर होने के साथ व्यापारिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है।

चार प्रमुख विद्युत परिसंपत्तियां चार्ज

कॉरिडोर की विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए छाता ट्रैक्शन सब-स्टेशन, कोसीकलां एसपी, मथुरा एसपी और शोलाका एसएसपी को सफलतापूर्वक चार्ज किया जा चुका है।

वहीं वृंदावन एसएसपी को 10 सितंबर, कोटवन एसएसपी को 15 सितंबर और आरडीई टीएसएस को 25 सितंबर 2026 तक कमीशन करने का लक्ष्य रखा गया है। होडल और अझई की सुविधाओं की कमीशनिंग सितंबर में तथा संधी टीएसएस एवं लाइन का कार्य अक्टूबर में पूरा करने का लक्ष्य है।

मथुरा-भूतेश्वर खंड में काम अंतिम चरण में

मथुरा-भूतेश्वर खंड में ऑक्जिलरी अर्थ कंडक्टर का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अधिकांश नींव और मस्तूल निर्माण का कार्य पूरा हो गया है। अब स्टेशन क्षेत्रों में कमीशनिंग से जुड़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इसके साथ ही आगरा कंट्रोल हब में एससीएडीए प्रणाली का एकीकरण अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इससे विद्युत व्यवस्था की दूरस्थ निगरानी और वास्तविक समय में तकनीकी खराबियों की पहचान संभव होगी।

30 सितंबर की समय सीमा अहम

हाई-स्पीड परीक्षणों की राह आसान करने के लिए मथुरा और भूतेश्वर यार्ड री-मॉडलिंग के दूसरे चरण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। मौजूदा रेल यातायात को प्रभावित किए बिना नई यूपी लाइन और चौथी लाइन से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। भूतेश्वर यार्ड में जटिल कट-कनेक्शन का कार्य भी शामिल है।

रेलवे के अनुसार सभी संबंधित विभाग 30 सितंबर 2026 की निर्धारित समय सीमा को हासिल करने के लिए समन्वित रूप से कार्य कर रहे हैं। इसके बाद कॉरिडोर पर पूर्ण स्तर पर हाई-स्पीड परीक्षण शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

मिशन रफ्तार के तहत हो रहे ये कार्य भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे को आधुनिक और अधिक क्षमता वाला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।