दिव्यांगजनों के अधिकारों को लेकर मुख्यमंत्री से मिले सूर्यदेव सिंह सोमवंशी

अंत्योदय राशन कार्ड से आयुष्मान कवरेज तक पांच प्रमुख मांगें, दिव्यांग आयोग के गठन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी जोर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के दिव्यांगजनों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा प्रशासनिक एवं राजनीतिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों को लेकर राष्ट्रीय युवा संसद के प्रतिभागी सूर्यदेव सिंह सोमवंशी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ में भेंट की। उन्होंने मुख्यमंत्री को पांच सूत्रीय मांगों से संबंधित प्रार्थना पत्र सौंपते हुए दिव्यांगजनों की समस्याओं के स्थायी एवं नीतिगत समाधान के लिए शासन स्तर पर प्रभावी पहल की मांग की।

मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात के दौरान दिव्यांगजनों की सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासनिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े विषयों पर सार्थक संवाद हुआ। सोमवंशी ने कहा कि दिव्यांगजन केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की महत्वपूर्ण मानवशक्ति हैं। इसलिए उनके लिए कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ अधिकार, अवसर और निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

पात्र दिव्यांगजनों के लिए अंत्योदय राशन कार्ड की मांग

सोमवंशी ने आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर पात्र दिव्यांगजनों को अंत्योदय अन्न योजना के अंतर्गत राशन कार्ड उपलब्ध कराने के लिए सरल और स्पष्ट व्यवस्था की मांग की। उन्होंने कहा कि पात्र दिव्यांगजनों को केवल परिवार के सदस्यों की संख्या अथवा तकनीकी कारणों से खाद्य सुरक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने पात्र दिव्यांगजनों को चिन्हित कर विशेष अभियान चलाने तथा पात्रता के आधार पर राशन कार्ड उपलब्ध कराने की व्यवस्था किए जाने का आग्रह किया।

आयुष्मान योजना में पात्र दिव्यांगजनों की प्रभावी कवरेज

स्वास्थ्य सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को कई परिस्थितियों में निरंतर उपचार, दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता होती है। ऐसे में पात्र दिव्यांगजनों को आयुष्मान भारत/मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से प्रभावी रूप से जोड़ने की आवश्यकता है।

उन्होंने मांग की कि केवल राशन कार्ड की श्रेणी, परिवार के सदस्यों की संख्या अथवा अन्य तकनीकी कारणों के चलते पात्र दिव्यांगजन स्वास्थ्य सुरक्षा से वंचित न हों। इसके लिए विशेष पंजीकरण अथवा कवरेज व्यवस्था विकसित करने पर विचार किए जाने का आग्रह किया गया।

उत्तर प्रदेश दिव्यांग आयोग के गठन की मांग

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण मांगों में उत्तर प्रदेश में राज्य दिव्यांग आयोग के गठन का मुद्दा भी शामिल रहा। सोमवंशी ने कहा कि प्रदेश के दिव्यांगजनों की शिकायतों, अधिकारों, सरकारी योजनाओं और नीतियों की प्रभावी निगरानी के लिए एक मजबूत संस्थागत व्यवस्था आवश्यक है।

उन्होंने प्रस्तावित आयोग को दिव्यांगजनों की शिकायतों की सुनवाई, नीतिगत सुझाव, योजनाओं की समीक्षा, अधिकारों के अनुपालन की निगरानी तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसी जिम्मेदारियां दिए जाने की मांग की। साथ ही आयोग में दिव्यांगजनों का पर्याप्त और वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

प्रशासनिक व्यवस्था में योग्य दिव्यांगजनों की भागीदारी

सोमवंशी ने दिव्यांगजनों से संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था में योग्य एवं अनुभवी दिव्यांगजनों की भागीदारी बढ़ाने की मांग की। उनका कहना था कि दिव्यांग समाज की जमीनी समस्याओं को समझने में स्वयं दिव्यांग व्यक्तियों का अनुभव महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने लागू नियमों और पात्रता के अनुरूप संबंधित रिक्त पदों पर योग्य दिव्यांगजनों को अवसर देने तथा नीति निर्माण एवं प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

पंचायत से विधानमंडल तक प्रतिनिधित्व की मांग

दिव्यांगजनों की राजनीतिक भागीदारी को लेकर भी उन्होंने महत्वपूर्ण पहल की मांग रखी। प्रार्थना पत्र में पंचायत से लेकर विधानसभा और विधान परिषद तक दिव्यांगजनों के प्रतिनिधित्व से जुड़े संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों के प्रभावी अनुपालन तथा आवश्यकतानुसार विधिक एवं नीतिगत पहल किए जाने का अनुरोध किया गया।

इसके अलावा दिव्यांगजनों से संबंधित नीतियों और योजनाओं पर निर्णय लेने वाले आयोगों, निगमों, बोर्डों एवं समितियों में कम से कम एक योग्य दिव्यांग सदस्य को प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई। सोमवंशी ने कहा कि दिव्यांगजनों के संबंध में बनने वाली नीतियों में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी बढ़ाने से योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ?दिव्यांगजनों के लिए निर्णय, दिव्यांगजनों की भागीदारी के साथ? की भावना को शासन व्यवस्था में व्यवहारिक रूप दिया जाना चाहिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री से पांचों मांगों पर उच्चस्तरीय समीक्षा कर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देने तथा दिव्यांगजनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद की व्यवस्था किए जाने का अनुरोध किया।

सोमवंशी ने कहा कि उनका उद्देश्य दिव्यांगजनों के मुद्दों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बनाना नहीं, बल्कि उन्हें शासन की प्राथमिकताओं में प्रभावी रूप से शामिल कराना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और सशक्तीकरण से जुड़े इन विषयों पर सकारात्मक पहल करेगी।

सूर्यदेव सिंह सोमवंशी राष्ट्रीय युवा संसद के प्रतिभागी हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और संवैधानिक माध्यमों से दिव्यांग समाज की आवाज शासन तक पहुंचाना उनका निरंतर प्रयास रहेगा।