झांसी वैगन मरम्मत कारखाने का बड़ा नवाचार, डिटेचेबल वैगन बॉडी सिस्टम से रेलवे को हर साल करीब 185 करोड़ रुपये की संभावित बचत

उत्तर मध्य रेलवे के झांसी वैगन मरम्मत कारखाने ने मालगाड़ियों के खुले वैगनों (ओपन फ्रेट वैगन) के लिए एक अभिनव डिटेचेबल अपर बॉडी सिस्टम विकसित किया है। इस नई तकनीक में वैगन की ऊपरी संरचना (साइड वॉल, एंड वॉल और फ्लोर) को विशेष लॉकिंग और गाइडिंग मैकेनिज्म की मदद से आसानी से अलग कर दोबारा जोड़ा जा सकता है। यह आविष्कार भारतीय रेलवे की माल परिवहन व्यवस्था को अधिक तेज, किफायती और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वर्तमान व्यवस्था में वैगन की पूरी बॉडी अंडरफ्रेम से स्थायी रूप से वेल्ड रहती है। ऐसे में यदि केवल बॉडी का कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त हो जाए तो पूरे वैगन को मरम्मत के लिए कार्यशाला भेजना पड़ता है, जिससे वैगन कई दिनों तक सेवा से बाहर रहता है। झांसी कार्यशाला द्वारा विकसित नई प्रणाली में केवल क्षतिग्रस्त ऊपरी बॉडी को हटाकर उसकी जगह पहले से तैयार दूसरी बॉडी लगा दी जाएगी, जबकि अंडरफ्रेम तुरंत दोबारा उपयोग में आ सकेगा।

इस तकनीक में दोनों ओर तीन-तीन यानी कुल छह विशेष लॉकिंग मैकेनिज्म लगाए गए हैं तथा सही फिटिंग सुनिश्चित करने के लिए गाइडिंग पोस्ट भी लगाए गए हैं। भारी मरम्मत की स्थिति में लॉकिंग सिस्टम खोलकर क्रेन की सहायता से पूरी ऊपरी बॉडी हटाई जाएगी और नई बॉडी लगाकर वैगन को कम समय में फिर से सेवा में भेज दिया जाएगा।

इस नवाचार से वैगनों की मरम्मत का समय मौजूदा लगभग छह दिनों से घटकर करीब तीन दिन रह जाएगा। इससे कार्यशालाओं पर दबाव कम होगा, वैगनों की उपलब्धता बढ़ेगी, दुर्घटना के बाद रेल मार्ग को जल्द बहाल करने में मदद मिलेगी तथा माल ढुलाई की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

रेलवे के अनुसार, एक माल वैगन प्रतिदिन औसतन 12,600 रुपये का राजस्व अर्जित करता है। वर्तमान में भारतीय रेलवे में प्रतिदिन लगभग 680 वैगन मरम्मत के लिए कार्यशालाओं में जाते हैं, जिनमें से करीब 255 वैगनों को केवल बॉडी संबंधी मरम्मत की आवश्यकता होती है। नई तकनीक लागू होने पर अंडरफ्रेम को तुरंत उपयोग में लाया जा सकेगा, जिससे राजस्व हानि में बड़ी कमी आएगी।

प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण के अनुसार इस प्रणाली से मरम्मत अवधि घटने और वैगनों की उपलब्धता बढ़ने के कारण भारतीय रेलवे को प्रतिवर्ष लगभग 184.74 करोड़ रुपये तक की संभावित बचत हो सकती है। यह स्वदेशी नवाचार भविष्य में भारतीय रेलवे के सभी ओपन फ्रेट वैगनों में लागू किया जा सकता है, जिससे परिचालन दक्षता, रखरखाव व्यवस्था और माल परिवहन क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।