दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में क्षेत्रीय संरक्षा संगोष्ठी आयोजित, सुरक्षित रेल संचालन पर दिया गया विशेष जोर

बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय, बिलासपुर के न्यू ऑडिटोरियम हॉल में सोमवार को क्षेत्रीय संरक्षा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। महाप्रबंधक तरुण प्रकाश के निर्देशन और प्रधान मुख्य संरक्षा अधिकारी अनूप सतपथी के नेतृत्व में आयोजित इस संगोष्ठी में तीनों मंडलों?बिलासपुर, रायपुर और नागपुर?के मंडल रेल प्रबंधकों, विभागाध्यक्षों, अधिकारियों, वरिष्ठ पर्यवेक्षकों, सेफ्टी काउंसलर्स तथा बड़ी संख्या में रेल कर्मचारियों ने भाग लिया।

संगोष्ठी का उद्देश्य रेलवे में सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध रेल संचालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ संरक्षा संस्कृति को और अधिक मजबूत बनाना था। इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और दुर्घटना निवारण, जोखिम प्रबंधन तथा बेहतर समन्वय पर विस्तार से चर्चा की।

महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने अपने संबोधन में कहा कि "यदि कोई कार्य सुरक्षित ढंग से नहीं किया जा सकता, तो वह कार्य सही ढंग से किया ही नहीं जा सकता।" उन्होंने कहा कि रेलवे में संरक्षा किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की साझा जिम्मेदारी है। छोटी-छोटी लापरवाहियां भी बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं, इसलिए संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान और उनका समाधान आवश्यक है।

उन्होंने अधिकारियों और पर्यवेक्षकों से नियमित सेफ्टी काउंसलिंग, कर्मचारियों के सतत प्रशिक्षण, असुरक्षित परिस्थितियों की तत्काल रिपोर्टिंग और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

दिनभर चले दो तकनीकी सत्रों में इंजीनियरिंग, परिचालन, सिग्नल एवं दूरसंचार, विद्युत और मैकेनिकल विभागों ने सुरक्षित रेल संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्तुतियां दीं। इंजीनियरिंग विभाग ने वैज्ञानिक ट्रैक अनुरक्षण, यूएसएफडी परीक्षण और आधुनिक ट्रैक मशीनों के उपयोग पर जोर दिया, जबकि सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग ने सिग्नलिंग प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जानकारी दी।

मैकेनिकल विभाग ने हॉट एक्सल बॉक्स डिटेक्टर, ट्रेन पार्टिंग की रोकथाम और अग्नि सुरक्षा प्रबंधन पर प्रकाश डाला। वहीं विद्युत विभाग ने एसपीएडी (Signal Passed at Danger) की रोकथाम, ओएचई सुरक्षा और लोको संचालन से जुड़े सुरक्षा उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। परिचालन विभाग ने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।

संगोष्ठी के दौरान पैनल चर्चा में अधिकारियों और कर्मचारियों ने संरक्षा से जुड़े अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए तथा सुरक्षित रेल संचालन के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। अंत में महाप्रबंधक ने सभी रेल कर्मियों से हर कार्य को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप करने, किसी भी असुरक्षित स्थिति की अनदेखी न करने और मजबूत संरक्षा संस्कृति विकसित करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज अपनाई गई सुरक्षित कार्य संस्कृति ही भविष्य में यात्रियों, कर्मचारियों और रेलवे की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।