डब्ल्यू एफ के सौजन्य से गैंडा मॉनिटरिंग को लेकर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन।

  • विशेषज्ञ प्रशिक्षक के द्वारा वन कर्मियों को किया गया प्रशिक्षित।
  • गैंडा के बारे में विशेष जानकारी के लिए चयनित वनकर्मी जाएंगे दुधवा नेशनल पार्क।

वाल्मीकि नगर से अभिमन्यु कुमार गुप्ता की रिपोर्ट।इंडो-नेपाल सीमा के वाल्मीकि नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में शनिवार को डब्ल्यू डब्ल्यू एफ इंडिया के सौजन्य से गैंडा मॉनिटरिंग के बाबत वाल्मीकि टाइगर रिजर्व वन प्रमंडल एक और दो के सभी आठ रेंज के वन कर्मियों को एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षण में ट्रेनर के रूप में राइनो एक्सपर्ट असम से आए डॉ अमित शर्मा और डॉ रोहित रवि डब्लू डब्लू एफ दुधवा नेशनल पार्क उत्तर प्रदेश के अलावा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन संरक्षक सह क्षेत्र निर्देशक गौरव ओझा ने कई टेक्निकल बिंदुओं पर वन कर्मियों को प्रशिक्षित किया। इस बाबत जानकारी देते हुए वन संरक्षक गौरव ओझा ने बताया कि बाघ संरक्षण के क्षेत्र में हम सामूहिक और सकारात्मक प्रयास से काफी बेहतर कर रहे हैं। बाघों की संख्या में आशातित वृद्धि हुई है ।टाइगर रिजर्व में नेपाल से आए दो मेहमान गैंडा निवास कर रहे हैं। उनके प्रोटेक्शन और मॉनिटरिंग को हम और बेहतर कैसे करें ,भविष्य में गैंडा की संख्या अगर बढ़ती है या गैंडा प्रजनन पर कार्य होता है या बाढ़ की स्थिति या समान्य स्थिति में गैंडा नेपाल से आते हैं,तो ऐसी स्थिति में कैसे उनको संरक्षण देते हुए आगे बढ़ाना है, कैसी रणनीति तय करनी है, मॉनिटरिंग को कैसे वैज्ञानिक तरीके से सुनिश्चित करनी है, किसी भी प्रकार का जोखिम की संभावना न हो, जैसे शिकार या वन क्षेत्र से बाहरी क्षेत्र में वन्य जीव का निकलना इन सभी बिंदुओं को सुनिश्चित करने हेतु नियमित प्रशिक्षण की प्रक्रिया चलायी जाती है।इसी क्रम में डब्लू डब्लू एफ इंडिया के सौजन्य से हमारे द्वारा डिवीजन एक और दो के सभी 8 रेंज के वन कर्मियों को इस प्रशिक्षण में शामिल किया गया है।तथा उनको प्रशिक्षित किया जा रहा है। विशेष रूप से हमारे कुछ कर्मी गैंडा मॉनिटरिंग के लिए पहले से कार्य कर रहे हैं ।उन सभी को और बेहतर कैसे बनाया जाए। इसके लिए इस प्रशिक्षण कार्यशाला को आयोजन किया गया है ।वन कर्मियों को टेक्निकल बिंदु का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा । डब्ल्यू डब्ल्यू एफ इंडिया की तरफ से दुधवा नेशनल पार्क उत्तर प्रदेश से एक विशेषज्ञ विशेष रूप से इस मीटिंग में प्रशिक्षण दे रहे हैं। जो रेडियो कॉलिरिंग जैसे बिंदु पर फोकस करेंगे कि कैसे रेडियो कॉलिरिंग किया जाता है। हमें उसका क्या फायदा होता है,तथा क्षेत्र में और क्या हो सकता है।

*चयनित वनकर्मी प्रशिक्षण के लिए जाएंगे दुधवा नेशनल पार्क*:

श्री ओझा ने आगे बताया कि बहुत जल्द चयनित वनकर्मियों को दुधवा नेशनल पार्क में भी सरकार की अनुमति मिलने के बाद प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। इसके साथ-साथ हाथी से वीटीआर में मॉनिटरिंग कैसे करनी है इन सभी बिंदुओं पर भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में वनपाल , वनरक्षी, टीटी, गैंडा टेकर सहित अन्य वनकर्मी शामिल है।प्रशिक्षण में शामिल वनकर्मियों में से चयनित वनकर्मियों को दुधवा नेशनल पार्क में प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी जानकारी को और बेहतर बनाया जाएगा। इस प्रशिक्षण में पेट्रोलिंग ,रेस्क्यू, वन्यजीवों की सुरक्षा वन संपदा की सुरक्षा के बिंदु पर जानकारी दी जा रही है ।इसके साथ-साथ वनकर्मियों के पास इन परिस्थितियों में क्या टूल्स उपकरण होने चाहिए। इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस कार्यशाला में

सी एफ गौरव ओझा,डीएफओ वन प्रमंडल दो विकाश अहलावत,डॉ अमित शर्मा डब्लू डब्लू एफ आसाम,

डॉ रोहित रवि डब्लू डब्लू एफ दुधवा नेशनल पार्क ,वाल्मीकिनगररेंजर सत्यम कुमार,मदनपुर रेंजर नसीम अहमद,हरनाटांड़ रेंजर शिव कुमार राम, सुनील पाठक,फील्ड बायोलॉजिस्टडॉ सौरभ वर्मा डब्लू डब्लू एफ ,अहबर आलम डब्लू डब्लू एफ ,डॉ संजीव रंजन पशु चिकित्सक सहित अन्य अधिकारी और वनकर्मी मौजूद रहे।