पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल : सूर्यदेव सिंह सोमवंशी

संवाददाता। राष्ट्रीय युवा संसद में प्रतिभाग करने वाले देश के प्रथम दिव्यांग एवं युवा सामाजिक कार्यकर्ता सूर्यदेव सिंह सोमवंशी ने पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 का स्वागत करते हुए इसे देश के करोड़ों विद्यार्थियों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के हित में एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सोमवंशी ने कहा कि देश का युवा वर्ग वर्षों तक कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है। ऐसे में पेपर लीक, संगठित नकल, प्रश्नपत्रों की अवैध खरीद-फरोख्त तथा अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताएं न केवल प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ अन्याय करती हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, सरकारी भर्ती प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि "कठोर कानून और जवाबदेही ही पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था तथा सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला हैं।"

उन्होंने कहा कि पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को बढ़ावा देना, संगठित परीक्षा अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना तथा ईमानदार एवं मेहनती अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा करना है। यदि इस कानून का प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन किया जाता है तो इससे परीक्षा माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा युवाओं का विश्वास बहाल करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।

सूर्यदेव सिंह सोमवंशी ने कहा कि भारत जैसे युवा देश में प्रतिभा और परिश्रम ही सफलता का आधार होना चाहिए, न कि भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियां। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके युवाओं की योग्यता, ईमानदारी और अवसरों की समानता पर निर्भर करती है। इसलिए प्रत्येक प्रतिभाशाली विद्यार्थी को बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि परीक्षा सुधार केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार, प्रशासन, परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं, न्याय व्यवस्था, शिक्षण संस्थानों तथा समाज के सभी वर्गों की साझा जिम्मेदारी है। सभी के समन्वित प्रयासों से ही ऐसी परीक्षा व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जिसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार या पेपर लीक के लिए कोई स्थान न हो।

सोमवंशी ने सभी राजनीतिक दलों, शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों, अभिभावकों और जागरूक नागरिकों से छात्र हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि परीक्षा सुधार जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सकारात्मक और रचनात्मक सहयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पब्लिक एग्जामिनेशन (संशोधन) विधेयक, 2026 का प्रभावी क्रियान्वयन देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और विश्वसनीय बनाएगा तथा युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।