वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ ऑपरेशन मानसून

वाल्मीकि नगर से अभिमन्यु कुमार गुप्ता की रिपोर्ट।वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना में वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चौकसी कड़ी कर दी गई है। हमेशा की तरह बारिश के मौसम में शिकारियों की घुसपैठ और वन अपराध की आशंका को देखते हुए वन विभाग ने 'ऑपरेशन मानसून' के तहत विशेष गश्ती अभियान शुरू किया है। यह अभियान 15 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगा. वन विभाग के सभी रेंजों में विशेष गश्ती टीमें गठित की गई हैं। टीमों में शामिल वन्य कर्मियों को जंगल में वन्यजीवों की गतिविधियों, बाघ समेत अन्य जानवरों के पदचिह्न, अवैध कटाई, मानवीय गतिविधियों और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी कर दैनिक रिपोर्ट का निर्देश दिया गया है। गंडक नदी,नेपाल तथा उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है।वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन संरक्षक सह क्षेत्र निदेशक गौरव ओझा ने बताया कि सभी रेंज अधिकारियों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष गश्त को पहले की तुलना में अधिक स्मार्ट और आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है, ताकि बारिश के दौरान भी वन एवं वन्यजीवों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

*बाघों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती.

मानसून के दौरान टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा वन विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। बारिश से जंगल के कच्चे रास्ते आवागमन के लिए सुलभ नहीं होता है। मार्ग दलदल कीचड़ युक्त होने से आवागमन में कठिनाइयां आती हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में वाल्मीकि नगर वनक्षेत्र में गश्त के लिए हाथियों का सहारा लिया जा रहा है। वन विभाग का कहना है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद जंगल के चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि शिकारियों और वन तस्करों की किसी भी गतिविधि को समय रहते अंकुश लगाया जा सके।