हरदोई में पांच साल पुराने संविदा बिजली कर्मी को हटाने पर उठे सवाल, रिश्वत लेकर नई भर्ती कराने का आरोप, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

हरदोई। उत्तर प्रदेश सरकार जहां युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और संविदा कर्मियों के हितों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयासरत होने का दावा कर रही है, वहीं हरदोई में बिजली विभाग से जुड़ा एक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। पांच वर्षों से सांडी रोड ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र पर कार्यरत संविदा कर्मी राजीव शुक्ला ने सेवा से हटाए जाने और रिश्वत लेकर नई भर्ती किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
राजीव शुक्ला का कहना है कि सरकार द्वारा नई संविदा भर्तियों पर रोक लगाए जाने तथा हटाए गए कर्मियों को पुनः समायोजित करने के निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद उन्हें दोबारा कार्य पर नहीं रखा गया। उनका आरोप है कि संबंधित एजेंसी वर्ल्ड क्लास सर्विस लिमिटेड के सुपरवाइजर ओम जी गुप्ता ने उन्हें पुनर्नियुक्त करने के बदले 70 हजार रुपये की मांग की। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह यह रकम नहीं दे सके, जिसके बाद उन्हें काम पर नहीं रखा गया।
पीड़ित का कहना है कि उन्होंने मामले की शिकायत विभागीय अधिकारियों, आईजीआरएस पोर्टल तथा पुलिस से भी की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि शिकायतों का निस्तारण भी निष्पक्ष ढंग से नहीं किया गया।
राजीव शुक्ला ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि रिश्वत लेकर भर्ती किए जाने के आरोप सही पाए जाएं तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से कार्य कर रहे संविदा कर्मियों को हटाकर अन्य लोगों से धन लेकर नई नियुक्तियां करना शासन की मंशा के विपरीत है। फिलहाल इस पूरे मामले में एक्सईएन की भी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही हैं।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक बिजली विभाग, संबंधित कंपनी अथवा आरोपित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में अब सभी की निगाहें इस मामले में प्रशासन और विभागीय जांच पर टिकी हुई हैं।