उत्तर मध्य रेलवे की ऐतिहासिक उपलब्धि, टूंडला–पनकी धाम रेलखंड पर ‘कवच 4.0’ प्रणाली का सफल संचालन

रेल सुरक्षा के क्षेत्र में उत्तर मध्य रेलवे ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उत्तर मध्य रेलवे ने टूंडला जंक्शन से पनकी धाम रेलखंड पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से ट्रेन संचालन के लिए अत्याधुनिक कवच संस्करण 4.0 प्रणाली का सफलतापूर्वक संचालन शुरू कर दिया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर मध्य रेलवे का कुल 652 रूट किलोमीटर रेल मार्ग अब कवच 4.0 सुरक्षा प्रणाली से लैस हो गया है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह उपलब्धि भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्य नरेश पाल सिंह तथा डी. के. सिन्हा के नेतृत्व और मार्गदर्शन में पूरा किया गया। इस परियोजना को प्रोजेक्ट यूनिट टूंडला, प्रयागराज मंडल और मुख्यालय की टीमों के समन्वित प्रयासों से सफल बनाया गया।

कमीशनिंग के दौरान अप दिशा में कानपुर शताब्दी एक्सप्रेस तथा डाउन दिशा में सिक्किम महानंदा एक्सप्रेस का सफल संचालन किया गया। दोनों ट्रेनों में कर्नेक्स द्वारा विकसित कवच प्रणाली लगाई गई थी।

इस परियोजना के अंतर्गत 207 रूट किलोमीटर रेलखंड को कवच प्रणाली से जोड़ा गया। इसके लिए 22 एस-टीकैस और 17 एलसी-टीकैस स्टेशनों पर स्थायी कवच प्रणाली स्थापित की गई। साथ ही 10 डब्ल्यूएपी-7 विद्युत रेल इंजन सफलतापूर्वक तैयार किए गए, 4600 से अधिक रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान टैग लगाए गए, 17 नए 40 मीटर ऊंचे टावर स्थापित किए गए, 48-कोर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई तथा 30 कवच कक्ष विकसित किए गए।

रेलवे ने बताया कि इस प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तकनीकी परीक्षण किए गए। इसके तहत 10 हजार किलोमीटर से अधिक परीक्षण, 190 से अधिक सिग्नल पार करने से संबंधित सुरक्षा परीक्षण, गति नियंत्रण परीक्षण तथा आमने-सामने और पीछे से संभावित टक्कर रोकने संबंधी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए। इसके अतिरिक्त वंदे भारत एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस, श्रमशक्ति एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनों पर भी इसका सफल परीक्षण किया गया।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार टूंडला?पनकी धाम रेलखंड पर कवच 4.0 प्रणाली की सफल शुरुआत देश के महत्वपूर्ण दिल्ली?हावड़ा रेल मार्ग पर सुरक्षित, आधुनिक और तेज गति रेल संचालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है। यह उपलब्धि उत्तर मध्य रेलवे के सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग की तकनीकी दक्षता, नवाचार और रेल सुरक्षा के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है।