अहमदाबाद मंडल ने ओएचई निगरानी के लिए अपनाई ड्रोन तकनीक, रेलवे सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती

अहमदाबाद मंडल ने ओएचई निगरानी के लिए अपनाई ड्रोन तकनीक, रेलवे सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती

पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल ने रेलवे सुरक्षा और आधुनिक रखरखाव व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंडल ने ओवरहेड उपकरण (ओएचई) की जांच के लिए ड्रोन आधारित हवाई निरीक्षण तकनीक का सफल परीक्षण किया है। यह भारतीय रेल में नई तकनीक के जरिए सुरक्षित और बेहतर रखरखाव प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

रेलवे बोर्ड द्वारा अप्रैल 2026 में अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन के दिशा-निर्देश संख्या टीआई/आईएन/0060 को मंजूरी मिलने के बाद पश्चिम रेलवे इस तकनीक को अपनाने वाले प्रमुख जोनों में शामिल हो गया है। 8 जून 2026 को हुए इस सफल परीक्षण ने पारंपरिक मैनुअल निरीक्षण की जगह आधुनिक और सुरक्षित तकनीकी व्यवस्था का रास्ता खोल दिया है।

ड्रोन से हुआ हाईटेक निरीक्षण

नागर विमानन महानिदेशालय के मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले कैमरों और स्थान चिन्हांकन सुविधा से लैस ड्रोन की मदद से अहमदाबाद मंडल की टीम ने ओएचई संरचनाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान पाई गई हर खराबी की तस्वीर ली गई, उसे स्थान विवरण के साथ रिकॉर्ड किया गया और उसकी गंभीरता का मूल्यांकन किया गया। इससे जरूरी मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा सकेगा।

समय रहते मिली कई गंभीर खराबियां

परीक्षण के दौरान इंसुलेटरों पर फ्लैश मार्क, कैंटिलीवर पर फंसी बाहरी सामग्री, संरचनाओं पर पक्षियों के घोंसले, वहां बैठे पक्षी और तारों में नुकसान जैसी कई गंभीर तकनीकी खामियां सामने आईं। इनमें कई ऐसी खराबियां थीं जिन्हें सामान्य निरीक्षण के दौरान पहचानना बेहद कठिन होता है।

ड्रोन से ली गई साफ और स्थान-चिन्हित तस्वीरों की मदद से इन खराबियों का सटीक स्थान पता चला, जिससे समय पर मरम्मत कर भविष्य में बिजली आपूर्ति में बाधा और ट्रेन संचालन से जुड़ी समस्याओं को रोका जा सकेगा।

रेलवे सुरक्षा में होगा बड़ा सुधार

25 केवी एसी बिजली आपूर्ति देने वाली ओएचई प्रणाली भारतीय रेल के विद्युतीकृत नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें किसी भी प्रकार की खराबी ट्रेन संचालन को प्रभावित कर सकती है और सुरक्षा जोखिम भी बढ़ा सकती है। पारंपरिक निरीक्षण के लिए ट्रैक ब्लॉक लेना पड़ता है और कर्मचारियों को उच्च वोल्टेज उपकरणों के पास काम करना पड़ता है।

अब ड्रोन तकनीक के जरिए बिना ट्रैक ब्लॉक लिए तेजी से कई स्थानों की जांच की जा सकती है। अलग-अलग कोणों से तस्वीरें लेकर निरीक्षण रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे रखरखाव का काम और अधिक व्यवस्थित होगा।

भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता करेगी निगरानी

पश्चिम रेलवे अब इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रहा है। वर्तमान में निरीक्षण प्रक्रिया को मजबूत करने और उच्च गुणवत्ता वाला डेटा एकत्र करने पर काम किया जा रहा है। भविष्य में इसी डेटा का उपयोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण के लिए किया जाएगा।

इससे संभावित खराबियों का पहले से पता लगाया जा सकेगा और समय रहते जोखिमों को रोककर रेलवे नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक बनाया जा सकेगा। पश्चिम रेलवे भविष्य में इस तकनीक का विस्तार पूरे जोन सहित उपनगरीय रेल नेटवर्क तक करने की तैयारी कर रहा है।

यह पहल भारतीय रेल को तकनीकी रूप से और अधिक स्मार्ट, सुरक्षित तथा भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।