संसदीय समिति ने शुरू किया पूर्वोत्तर रेलवे परियोजनाओं का अध्ययन दौरा, सिक्किम की पहली रेल लाइन पर विशेष फोकस

संसदीय समिति ने शुरू किया पूर्वोत्तर रेलवे परियोजनाओं का अध्ययन दौरा, सिक्किम की पहली रेल लाइन पर विशेष फोकस

मालीगांव। पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेने के उद्देश्य से रेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अपना अध्ययन दौरा शुरू कर दिया है। सांसद डॉ. सी. एम. रमेश की अध्यक्षता में समिति 4 जून से 9 जून 2026 तक गंगटोक, कोलकाता और ऋषिकेश का दौरा करेगी।

लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों से युक्त यह उच्चस्तरीय समिति देशभर में, विशेषकर पूर्वोत्तर भारत में रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास, क्षमता विस्तार और कनेक्टिविटी सुदृढ़ीकरण से जुड़ी परियोजनाओं का अध्ययन कर रही है।

सिक्किम की पहली रेल लाइन का किया निरीक्षण

अध्ययन दौरे के पहले दिन समिति ने बहुप्रतीक्षित सिवोक-रंगपो रेल लाइन परियोजना के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया। प्रतिनिधिमंडल ने रेलवे स्टेशन, सुरंगों और पुलों का दौरा कर परियोजना की प्रगति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

अधिकारियों ने समिति को बताया कि लगभग 44.96 किलोमीटर लंबी सिवोक-रंगपो रेल लाइन सिक्किम को पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। परियोजना का लगभग 77 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसे दिसंबर 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

समिति ने रंगपो रेलवे स्टेशन स्थल तथा सुरंग संख्या-14 का भी निरीक्षण किया और परियोजना के निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

पूर्वोत्तर में रेल विस्तार पर होगी विशेष चर्चा

5 जून को गंगटोक में समिति की पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के महाप्रबंधक चेतन कुमार श्रीवास्तव तथा IRCON International Limited के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के साथ महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है।

बैठक का मुख्य विषय "पूर्वोत्तर और केंद्र शासित प्रदेशों में रेल नेटवर्क का विस्तार" रहेगा, जिसमें सिवोक-रंगपो रेल लाइन परियोजना पर विशेष चर्चा होगी। इस दौरान क्षेत्र में रेल संपर्क बढ़ाने, परिवहन अवसंरचना को मजबूत करने और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

पूर्वोत्तर के विकास की नई उम्मीद

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि सिवोक-रंगपो रेल परियोजना पूरी होने के बाद सिक्किम को पहली बार सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे यात्रियों और माल परिवहन को बड़ी सुविधा मिलेगी तथा पर्यटन, व्यापार और निवेश के नए अवसर विकसित होंगे।

यह परियोजना रणनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच आसान होगी तथा क्षेत्रीय एकीकरण को मजबूती मिलेगी।

रेल मंत्रालय की प्राथमिकता में पूर्वोत्तर

संसदीय समिति का यह अध्ययन दौरा पूर्वोत्तर भारत में रेलवे अवसंरचना के विस्तार के प्रति भारत सरकार और रेल मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निरीक्षण और संवाद से प्रमुख परियोजनाओं की निगरानी मजबूत होती है तथा विकास कार्यों को गति मिलती है।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने दोहराया है कि वह क्षेत्र में रेल परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और बेहतर कनेक्टिविटी, समावेशी विकास तथा आर्थिक समृद्धि के लक्ष्य को साकार करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।