Chandauli News:बाल विवाह से बचीं सात बेटियों को मिली नई उड़ान साइकिल पाकर शिक्षा की राह पर बढ़े आत्मविश्वास के कदम

कवच परियोजना के तहत छात्राओं को मिला प्रोत्साहन, अधिकारियों ने बढ़ाया हौसला
'बेटी पढ़ेगी, बेटी बढ़ेगी' के संदेश के साथ शिक्षा से जोड़ने की अनूठी पहल

संवाददाता कार्तिकेय पाण्डेय

चकिया।बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच चकिया में बेटियों के भविष्य को संवारने वाली एक प्रेरणादायक पहल सामने आई। मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान द्वारा संचालित कवच परियोजना के अंतर्गत उन सात बालिकाओं को साइकिल वितरित की गई, जिनके बाल विवाह को समय रहते रोककर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उपजिलाधिकारी पवन कुमार यादव एवं ब्लॉक प्रमुख शम्भूनाथ यादव ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

अतिथियों ने बालिकाओं को साइकिल प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया और शिक्षा के प्रति निरंतर समर्पित रहने का संदेश दिया। इस पहल का उद्देश्य छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में सुविधा उपलब्ध कराना तथा उनकी पढ़ाई को बिना किसी बाधा के जारी रखना है।उपजिलाधिकारी पवन कुमार यादव ने कहा कि बालिका शिक्षा समाज के विकास और सशक्त राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने कवच परियोजना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहलें न केवल बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने में सहायक हैं, बल्कि बेटियों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने का भी कार्य करती हैं। उन्होंने छात्राओं को नियमित रूप से विद्यालय जाने, मेहनत से पढ़ाई करने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित किया।ब्लॉक प्रमुख शम्भूनाथ यादव ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों की रक्षा प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता है। उन्होंने बालिकाओं से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और समाज के लिए प्रेरणा बनने का आह्वान किया।साइकिल प्राप्त करने के बाद बालिकाओं के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने नियमित रूप से विद्यालय जाने, पढ़ाई जारी रखने और अन्य बच्चों को भी शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस पहल को बाल विवाह के खिलाफ प्रभावी सामाजिक हस्तक्षेप बताते हुए इसकी सराहना की।

इस अवसर पर तहसीलदार देवेन्द्र कुमार यादव, दिनेश कुमार तथा संस्था की ओर से संजू, प्रीति, जितेन्द्र, मनोज और शहनाज सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।बाल विवाह की कगार से निकलकर शिक्षा की राह पर आगे बढ़ रही इन बेटियों के हाथों में साइकिल केवल एक साधन नहीं, बल्कि उज्ज्वल भविष्य, आत्मनिर्भरता और नए सपनों की उड़ान का प्रतीक बन गई है।