बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर उत्तर पश्चिम रेलवे के पहले वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट का उद्घाटन, जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर उत्तर पश्चिम रेलवे के पहले वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट का उद्घाटन, जल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

बाड़मेर। जल संरक्षण और पर्यावरणीय सतत विकास की दिशा में उत्तर पश्चिम रेलवे ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। गुरुवार को बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर जोन के पहले वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट का उद्घाटन उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक अमिताभ ने किया। इस अवसर पर उन्होंने स्टेशन पर चल रहे पुनर्विकास कार्यों का निरीक्षण कर उनकी प्रगति की भी समीक्षा की।

एक दिवसीय बाड़मेर दौरे पर पहुंचे महाप्रबंधक ने वाशिंग लाइन क्षेत्र में स्थापित इस अत्याधुनिक संयंत्र का बटन दबाकर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बाड़मेर में स्थापित इस प्लांट की उपयोगिता और सफलता को देखते हुए उत्तर पश्चिम रेलवे के अन्य मंडलों में भी ऐसे वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे।

महाप्रबंधक ने बताया कि लगभग 2.57 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस संयंत्र के माध्यम से रेलवे के लिनन जैसे चादर, तकिया कवर और तौलियों की धुलाई में उपयोग किए गए पानी को शुद्ध कर पुनः इस्तेमाल किया जाएगा। इससे बड़ी मात्रा में पानी की बचत होगी और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्र में यह परियोजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इससे न केवल पानी की खपत कम होगी, बल्कि भूजल और अन्य जल स्रोतों पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा। रेलवे की यह पहल पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

स्टेशन पुनर्विकास कार्यों का भी किया निरीक्षण

उद्घाटन समारोह से पूर्व महाप्रबंधक अमिताभ ने बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर चल रहे पुनर्विकास कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने यात्री सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था और स्टेशन परिसर के रखरखाव का जायजा लेते हुए अधिकारियों को गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर अमित स्वामी ने महाप्रबंधक का साफा और वेलकम प्लांट भेंट कर स्वागत किया।

इस अवसर पर जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी, मुख्य यांत्रिक इंजीनियर (योजना) मनीष राजवंशी, मुख्य परियोजना प्रबंधक (गति शक्ति) सुनील कुमार, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हितेश यादव, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक लोकेश कुमार सिंह तथा वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (पश्चिम) तरुण बीका सहित बड़ी संख्या में रेलवे अधिकारी उपस्थित रहे।

क्या है वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट?

वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट एक ऐसी आधुनिक प्रणाली है, जो उपयोग किए जा चुके पानी को उपचारित कर दोबारा उपयोग के योग्य बनाती है। बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर स्थापित संयंत्र में लिनन धुलाई में इस्तेमाल होने वाले पानी को एकत्र कर विभिन्न चरणों में शुद्ध किया जाता है। इसमें गंदगी और ठोस कणों को अलग करने, रासायनिक एवं जैविक उपचार, फिल्ट्रेशन और कीटाणुशोधन जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसके बाद शुद्ध किए गए पानी का पुनः धुलाई कार्य में उपयोग किया जाता है।

परियोजना के प्रमुख लाभ

पानी की बड़ी मात्रा में बचत होगी।

भूजल और अन्य जल स्रोतों पर दबाव कम पड़ेगा।

अपशिष्ट जल से होने वाला प्रदूषण घटेगा।

जल संकट वाले क्षेत्रों में जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।

रेलवे के जल उपयोग संबंधी खर्च में कमी आएगी।

उत्तर पश्चिम रेलवे की यह पहल पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के पुनः उपयोग और हरित रेलवे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।