कटड़ा में बनेगा विश्वस्तरीय ‘इंटरनेशनल म्यूज़ियम ऑफ गॉडेस’, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने की उच्चस्तरीय बैठक

जम्मू। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हाने आज कटड़ा में प्रस्तावित अत्याधुनिक इंटरनेशनल म्यूज़ियम ऑफ गॉडेस की स्थापना को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सदस्यों, विद्वानों, शिक्षाविदों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया तथा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर विस्तृत चर्चा की गई।बैठक में महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरिजी महाराज, बलेश्वर राय, डॉ. अशोक भान, Sudha Murty (सुधा मूर्ति), गुंजन राणा, डॉ. के.के. तलवार, कुलभूषण आहूजा, ललित भसीन और सुरेश कुमार शर्मा सहित कई सदस्य मौजूद रहे। इसके अलावा पद्म प्रोफेसर विश्वमूर्ति शास्त्री, उपराज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. मंदीप के. भंडारी, जम्मू संभागीय आयुक्त रमेश कुमार, जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर उमेश राय, क्लस्टर विश्वविद्यालय जम्मू के कुलपति प्रोफेसर के.एस. चंद्रशेखर, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन कुमार वैश्य, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी आलोक मौर्य, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की क्षेत्रीय निदेशक श्रुति अवस्थी, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री महाराजा रणबीर सिंह परिसर के निदेशक प्रोफेसर सतीश कुमार कपूर, संस्कृत विद्वान डॉ. चंद्र मौली रैना सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।बैठक के दौरान संग्रहालय को आधुनिक तकनीक और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के अद्भुत संगम के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। प्रस्तावित संग्रहालय में माता शक्ति की महिमा को इमर्सिव स्टोरीटेलिंग, दुर्लभ कलाकृतियों, डिजिटल प्रस्तुतीकरण और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। संग्रहालय में 51 शक्तिपीठों की पवित्र प्रतीकात्मकता और मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों को विशेष रूप से दर्शाया जाएगा।श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बैठक में अब तक किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि दुनियाभर से सुझाव आमंत्रित करने के लिए एक समर्पित वेबसाइट शुरू की गई है। साथ ही देश के प्रमुख संग्रहालयों का अध्ययन करने हेतु विशेषज्ञ टीमों के दौरे भी कराए गए हैं तथा इस परियोजना को भव्य रूप देने के लिए विशेषज्ञों की पहचान की जा रही है।बैठक में संग्रहालय के लिए महानिदेशक (डायरेक्टर जनरल) के स्थायी पद के सृजन को मंजूरी दी गई, जो विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम के साथ इस परियोजना का नेतृत्व करेंगे। इसके अलावा परियोजना की अवधारणा, विकास और संचालन को सुचारु रूप से आगे बढ़ाने के लिए विशेष कोष (कॉर्पस फंड) बनाने को भी स्वीकृति प्रदान की गई।उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सुझाव दिया कि विशेषज्ञों की एक टीम उन प्रमुख शक्तिपीठों का दौरा करे, जिन्हें संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाना है। साथ ही विस्तृत शोध और वास्तुशिल्पीय डिजाइन तैयार करने के लिए विशेष सलाहकार नियुक्त करने पर भी सहमति बनी।बैठक में कहा गया कि यह संग्रहालय केवल एक पर्यटन स्थल नहीं होगा, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, भारतीय संस्कृति और ज्ञान का एक प्रमुख केंद्र बनेगा। इसमें आधुनिक पुस्तकालय और शोध केंद्र भी स्थापित किया जाएगा, जिससे नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और शक्तिपीठों की समृद्ध विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाएगी।