एनएफआर ने 1927 के ऐतिहासिक स्ट्रीम लोकोमोटिव 801-बी को किया पुनर्जीवित

एनएफआर ने 1927 के ऐतिहासिक स्ट्रीम लोकोमोटिव 801-बी को किया पुनर्जीवित

न्यू बंगाईगांव वर्कशॉप में ऑडियो-विजुअल इफेक्ट्स से किया गया आकर्षक नवीनीकरण

गुवाहाटी। भारत की समृद्ध रेल विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने ऐतिहासिक स्ट्रीम लोकोमोटिव संख्या 801-बी का सफलतापूर्वक पुनर्जीवन किया है। यह लोकोमोटिव वर्ष 1927 में मेसर्स नॉर्थ ब्रिटिश लोकोमोटिव कंपनी लिमिटेड, ग्लासगो (यूके) द्वारा निर्मित किया गया था।

एनएफआर द्वारा यह सूक्ष्म और ऐतिहासिक महत्व वाला नवीनीकरण कार्य न्यू बंगाईगांव वर्कशॉप में संपन्न किया गया है, जिसमें विरासत संरक्षण के साथ आधुनिक तकनीकी उन्नयन का भी समन्वय किया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पुनर्स्थापित लोकोमोटिव को वास्तविक स्ट्रीम लोकोमोटिव जैसी समकालिक ध्वनि प्रणाली, कृत्रिम धुएं का उत्सर्जन, तथा गतिशील प्रकाश प्रभावों (Dynamic Lighting Effects) से सुसज्जित किया गया है।

इन आधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीकों के जरिए इस विंटेज लोकोमोटिव को दृश्य एवं श्रव्य रूप से बेहद आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे स्ट्रीम युग का वास्तविक अनुभव फिर से जीवंत हो उठता है। एनएफआर ने बताया कि इन उन्नयनों को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि लोकोमोटिव की ऐतिहासिक मौलिकता बनी रहे और दर्शकों का अनुभव भी अधिक प्रभावशाली हो सके।

रेलवे के अनुसार स्ट्रीम लोकोमोटिव 801-बी प्रारंभिक 20वीं सदी की रेलवे इंजीनियरिंग और तकनीकी विकास की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। इसका पुनरुद्धार न केवल रेलवे इतिहास के संरक्षण की दिशा में अहम पहल है, बल्कि यह रेलवे प्रेमियों, पर्यटकों और युवा पीढ़ी के लिए भारतीय रेल के विकास को करीब से जानने का एक बेहतरीन अवसर भी प्रदान करेगा।

एनएफआर ने कहा कि यह पहल भारतीय रेल के उस व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसके तहत विरासत संपत्तियों को संरक्षित करते हुए उन्हें इंटरैक्टिव और अनुभवात्मक प्रदर्शनी के रूप में विकसित किया जा रहा है। उम्मीद जताई गई है कि उन्नत किया गया यह लोकोमोटिव एनएफआर के विरासत प्रदर्शनों और रेलवे प्रदर्शनी में एक प्रमुख आकर्षण बनेगा।

कपिंजल किशोर शर्मा मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, एनएफआर