पैरा तीरंदाज पायल नाग ने बैंकॉक में जीता स्वर्ण, बोलीं— “श्राइन बोर्ड और प्रशिक्षकों की बदौलत भारत को दिला पाई पदक”

कटरा। ओडिशा के एक साधारण मजदूर परिवार से निकलकर पैरा तीरंदाजी में देश का नाम रोशन करने वाली पायल नाग आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। आठ वर्ष की उम्र में बिजली का करंट लगने से पायल ने अपने चारों हाथ-पैर गंवा दिए थे, लेकिन कठिन हालात के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने संघर्ष को ताकत बनाकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को गौरवान्वित किया।

इस सप्ताह बैंकॉक (थाईलैंड) में आयोजित विश्व पैरा तीरंदाजी श्रृंखला में पायल नाग ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। महिला पैरा कंपाउंड फाइनल मुकाबले में पायल ने मौजूदा विश्व चैंपियन और अपनी आदर्श खिलाड़ी शीतल देवी को 139-136 से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह उनका पहला वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था, जिसमें उन्होंने असाधारण धैर्य और आत्मविश्वास दिखाते हुए स्वर्ण पदक जीतकर देश को बड़ी उपलब्धि दिलाई।

पायल नाग की सफलता के पीछे कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड तीरंदाजी अकादमी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पायल की प्रतिभा को कोच कुलदीप वेदवान ने पहचाना था, जिन्होंने शीतल देवी जैसी अंतरराष्ट्रीय चैंपियन को भी तैयार किया है। प्रतिभा देखकर पायल को कटरा लाया गया और यहां उन्हें विशेष रूप से डिजाइन किए गए धनुष से प्रशिक्षण दिया गया।

पायल नाग ने बैंकॉक में एक और स्वर्ण पदक जीतकर अपनी उपलब्धि को और ऊंचा किया। उन्होंने शीतल देवी के साथ मिलकर महिला कंपाउंड टीम स्पर्धा में भारत को कजाकिस्तान पर 150-147 से जीत दिलाई और दूसरा स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया।

कटरा में मीडिया से बातचीत करते हुए पायल ने अपने दोनों स्वर्ण पदक दिखाए और कहा,

मैं श्री माता वैष्णो देवी तीरंदाजी अकादमी में अभ्यास करती हूं। मैंने तीरंदाजी की शुरुआत यहीं से की। आज मैं अपने प्रशिक्षकों और श्राइन बोर्ड की बदौलत भारत को पदक दिला पाई हूं।?

उन्होंने बताया कि श्राइन बोर्ड ने उन्हें व्हीलचेयर उपलब्ध कराई, जिससे वह थाईलैंड में प्रतियोगिता खेलने जा सकीं। पायल ने कहा कि श्राइन बोर्ड ने उन्हें भोजन, आवास, यात्रा और जरूरी सुविधाएं प्रदान कीं तथा खेल उपकरणों की व्यवस्था भी की गई।

पायल नाग ने यह भी बताया कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

अकादमी की प्रशिक्षक अभिलाषा चौधरी ने कहा कि श्री माता वैष्णो देवी तीरंदाजी अकादमी जम्मू-कश्मीर का श्रेष्ठ खेल संस्थान है। उन्होंने बताया कि अकादमी ने अब तक दो अर्जुन पुरस्कार विजेता और 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी तैयार किए हैं। उन्होंने कहा कि यह देश का ऐसा अनोखा धार्मिक संस्थान है जो खेलों में लगातार बड़ा योगदान दे रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना चुका है।

पायल नाग की यह सफलता न केवल एक पदक जीतने की कहानी है, बल्कि यह साबित करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से कोई भी कठिनाई इंसान को रोक नहीं सकती। उनकी उपलब्धि देशभर के पैरा खिलाड़ियों और युवाओं के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा बन गई।

सोर्स (ANI)