दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सिग्नलिंग क्षेत्र में रचा नया कीर्तिमान

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में सिग्नलिंग क्षेत्र में रचा नया कीर्तिमान

ऑटोमेटिक सिग्नलिंग व इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के विस्तार से बढ़ी संरक्षा, क्षमता और समयबद्धता

बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आधुनिक तकनीकों के माध्यम से रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित, तेज और समयबद्ध बनाने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।

रेलवे प्रशासन द्वारा पारंपरिक सिग्नलिंग प्रणाली के स्थान पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) एवं ऑटोमेटिक सिग्नलिंग जैसी तकनीकों का तेजी से विस्तार किया गया है। इससे न केवल मानवीय त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हुई है, बल्कि रेल संचालन भी अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय बना है।

11 स्टेशनों पर नई इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित

वित्तीय वर्ष 2025-26 में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने 11 स्टेशनों पर नई इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित की। इससे जटिल यार्ड संरचनाओं में भी सुरक्षित एवं निर्बाध परिचालन सुनिश्चित हुआ। प्रमुख स्टेशन रहे

गोंदिया, उरगा, किरोड़ीमल नगर, कोथारी रोड, रायगढ़, सारागांव देवरी, चक्रधर नगर, कुरुद, बाराद्वार, पेंड्रा रोड एवं बालपुर रोड।

25 स्टेशनों पर EI प्रणाली में उन्नयन

इसके अतिरिक्त 25 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली में संशोधन एवं उन्नयन कार्य किया गया, जिससे सिग्नलिंग सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ी और परिचालन अधिक निर्बाध हुआ।

09 स्टेशनों पर पैनल इंटरलॉकिंग संशोधित

रेलवे ने 09 स्टेशनों पर पैनल इंटरलॉकिंग प्रणाली में भी सुधार एवं संशोधन कार्य कर संरक्षा और दक्षता को और बेहतर बनाया।

186 किलोमीटर में ऑटोमेटिक सिग्नलिंग का विस्तार

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 186 किलोमीटर रेलखंड पर ऑटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली का विस्तार किया। प्रमुख सेक्शन रहे?

दगोरी?निपनिया, गुदमा?गंगाझरी, उरकुरा?सरोना, कोतरलिया?जामगा, चांपा?सारागांव, रायगढ़?चक्रधर नगर?कोतरलिया, निपनिया?भाटापारा एवं रायगढ़?जेएसपीएल?किरोड़ीमल नगर।

संरक्षा में गुणात्मक सुधार

ऑटोमेटिक सिग्नलिंग लागू होने से एक ही सेक्शन में एक साथ एक से अधिक ट्रेनों का सुरक्षित संचालन संभव हुआ है। ब्लॉक सेक्शन को छोटे खंडों में विभाजित कर सिग्नलिंग व्यवस्था को और अधिक सटीक बनाया गया, जिससे ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी स्वतः सुनिश्चित होती है।

रेलवे के अनुसार इस प्रणाली से?

ट्रेनों के बीच सुरक्षित अंतराल बना रहता है

सिग्नल फेल होने पर भी संरक्षा स्वतः सुनिश्चित होती है

मानवीय त्रुटियों की संभावना बेहद कम होती है

सिस्टम विफलता में उल्लेखनीय कमी आती है

क्षमता और समयबद्धता में बढ़ोतरी

ऑटोमेटिक सिग्नलिंग एवं इंटरलॉकिंग के विस्तार से ट्रेन संचालन में तेजी आई है। अब कम समय अंतराल में अधिक ट्रेनें संचालित की जा रही हैं, जिससे लाइन क्षमता बढ़ी है और ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार हुआ है।

रेलवे प्रशासन ने बताया कि यह उपलब्धियाँ महाप्रबंधक तरुण प्रकाश के दूरदर्शी नेतृत्व एवं सतत मार्गदर्शन का परिणाम हैं। उनके निर्देशन में सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग ने आधुनिक तकनीक को अपनाकर संरक्षा, क्षमता और विश्वसनीयता के नए मानक स्थापित किए हैं।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग भविष्य में भी इसी प्रकार नई तकनीकों को अपनाते हुए रेल परिचालन को और अधिक सुरक्षित एवं बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।