अवध विश्वविद्यालय में वस्तुनिष्ठ परीक्षा प्रणाली के बजाय वर्णनात्मक परीक्षा प्रणाली हो लागू : डॉ जनमेजय तिवारी

लखनऊ/अयोध्या: आक्टा अध्यक्ष ने अवध विश्वविद्यालय में व्याप्त शिक्षक समस्याओं से उच्च शिक्षा मंत्री को कराया अवगत

डॉ राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या में व्याप्त शिक्षक समस्याओं से अवध विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ(आक्टा) के अध्यक्ष डॉ जनमेजय तिवारी ने लखनऊ में उच्च शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार योगेन्द्र उपाध्याय को अवगत कराते हुए कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य छात्रों के विश्लेषणात्मक, तार्किक और बौ?द्धिक रचनात्मकता का विकास करते हुए उन्हें एक आत्मनिर्भर, सशक्त और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। जीवन के हर चुनौतियों का समाधान करने हेतु इन क्षमताओं का विकास परमावश्यक है और विश्वविद्यालयों का यही मूल उ?द्देश्य भी है।

महोदय आज कतिपय विश्वविद्यालय अपनी इस मूल अवधारणा से असहमत हैं। उन्होंने अपना उद्देश्य प्रवेश, परीक्षा और परीक्षा परिणाम तक सीमित कर लिया है। डॉ राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय भी अब इसी कड़ी में शामिल हो गया है। विश्ववि?द्यालय ने सभी पाठ्यक्रमों सम सेमेस्टर में वस्तुनिष्ठ परीक्षा लागू कर दी है। महोदय उच्च शिक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न विषयों की गहन समझ के बजाय रटने को प्राथमिकता देते हैं, जिससे छात्र ज्ञान निर्माण के बजाय अनुमान लगाकर या उत्तरों को पहचान कर ही परीक्षा पास कर लेते हैं। ये प्रश्न अक्सर संश्लेषण, मूल्यांकन या लिखित अभिव्यक्ति जैसी उच्च स्तरीय सोच का आकलन करने में विफल रहते हैं। उच्च शिक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न (एमसीक्यू) अक्सर गहन समझ की बजाय रटने को प्राथमिकता देते हैं, जिससे छात्र ज्ञान निर्माण के बजाय अनुमान लगाकर या उत्तरों को पहचानकर ही परीक्षा पास कर लेते हैं। ये प्रश्न अक्सर संश्लेषण, मूल्यांकन या लिखित अभिव्यक्ति जैसी उच्च स्तरीय सोच का आकलन करने में विफल रहते हैं और सही/गलत के द्विआधारी परिणामों से परे सीमित नैदानिक प्रतिक्रिया प्रदान करते हैं। बहुविकल्पीय प्रश्न विद्यार्थियों संज्ञानात्मक स्तर को प्रभावित करते हैं। अक्सर जटिल अवधारणाओं के आलोचनात्मक चिंतन, अनुप्रयोग या संश्लेषण के बजाय बहुविकल्पीय प्रश्न वस्तुनिष्ठता की तरफ़ ले जाते हैं जो तर्कपूर्ण लेखन, मौलिकता, संगठन या व्यावहारिक अनुप्रयोग जैसे कौशलों का मापन नहीं करती हैं। आक्टा अध्यक्ष ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में आये दिन महामहिम राज्यपाल का दौरा लगने व राज्यपाल सचिवालय के अधिकारियों की समीक्षा बैठक होने के कारण विश्वविद्यालय की सभी गतिविधियां ठप सी रहती है। दूसरी विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा सम सेमेस्टर की परीक्षा में वस्तुनिष्ठ परीक्षा प्रणाली लागू कर अत्यधिक अल्प वेतन में जीवन यापन कर रहे स्ववित्तपोषित शिक्षकों को मूल्यांकन कार्य से वंचित किया जा रहा है। यहां तक कि विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के अधिकांश महाविद्यालयों में स्ववित्त पोषित शिक्षकों की स्थिति व शोषण किसी से छिपा नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नयी शिक्षा नीति के मूल प्रावधानों से इतर मनमाना निर्णय थोपा जा रहा है जो शिक्षा व्यवस्था के साथ साथ शिक्षक हित में कदापि नहीं है। महोदय आप अवगत हैं कि आए दिनों विभिन्न चयन आयोगों द्वारा विकल्प आधारित परीक्षाएँ आयोजित की जाती हैं जिससे आए दिन उत्तर के विकल्पों को लेकर अनावश्यक विवाद छिड़ जाते हैं। आयोग द्वारा कई प्रश्नों को रद्द करना पड़ता है या कभी कभी पूरी परीक्षा ही रद्द करनी पड़ती है । समय पर चयन प्रक्रिया संपन्न न होने से सरकार की छवि धूमिल होती है। महोदय बहुविकल्पीय परीक्षाएं सिर्फ़ प्राथमिक (स्क्रीनिंग) स्तर संपन्न कराई जाती है और संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोग की सभी मुख्य परीक्षाएं लिखित प्रणाली से ही संपन्न करायी जाती हैं।विश्वविद्यालय को जहाँ महाविद्यालयों में कौशल विकास हेतु प्रशिक्षण प्रदान करने की आवश्यकता पर बल देना चाहिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रयोगशालाओं को विकसित करना चाहिए, छात्रों के कौशल विकास हेतु शिक्षकों की नियुक्ति करना चाहिए वहाँ विश्ववि?द्यालय अपना पूरा ध्यान परीक्षा और परीक्षा परिणाम पर केंद्रित कर सरकार की नीतियों को निष्प्रभावी कर रहें हैं। विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के अधिकतर महाविद्यालय बिना प्राचार्य, बिना शिक्षक, बिना प्रयोगशाला, बिना प्रयोगशाला सहायक के चल रहे हैं। गिनती के कुछ महावि?द्यालयों ने नैक मूल्यांकन करवाया है विश्वविद्यालय को जहाँ गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था वहाँ ये छात्रों के अकादमिक हनन पर तुला हुआ है। एक तरफ़ जहाँ विश्ववि?द्यालय एआई पर शोध कर रहे हैं वहीं अवध विश्वविद्यालय छात्रों से डी लिट के पैसे लेकर उन्हें डिग्री नहीं दे रहा है। आप से सादर अनुरोध है कि पुण्यसलिला सरयू के गोद में पल्लवित और पुष्पित डॉ राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय पर आप अपनी कृपा दृष्टि बनाये और छात्र हित, शिक्षक हित और शिक्षा हित में बहुविकल्पीय परीक्षा व्यवस्था पर तत्काल प्रभाव से रोक लगवाते हुए लिखित परीक्षा प्रणाली को यथावत् रखने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें। शिक्षक संघ आपका आभारी रहेगा। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ (फुपुक्टा) के अध्यक्ष प्रो बीरेंद्र सिंह चौहान, लखनऊ विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) अध्यक्ष प्रो मनोज पाण्डेय, फुपुक्टा के संयुक्त मंत्री डॉ रवि कुमार चौरसिया, आक्टा महामंत्री प्रो अमूल्य कुमार सिंह, उत्तर प्रदेश अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अरूणेश अवस्थी, संयुक्त शिक्षक मोर्चा के अध्यक्ष डॉ अमित झा, महामंत्री अखिलेश्वर चौबे,उपाध्यक्ष डॉ घनश्याम यादव, डॉ नीरज बाजपेई, आशुतोष पांडेय आदि लोग उपस्थित रहे।