सीएसएमटी पर ‘डेक्कन क्वीन’ ट्रेन महोत्सव का आयोजन, ऐतिहासिक विरासत का हुआ भव्य उत्सव

सीएसएमटी पर 'डेक्कन क्वीन' ट्रेन महोत्सव का आयोजन, ऐतिहासिक विरासत का हुआ भव्य उत्सव

फूलों से सजी डेक्कन क्वीन, यात्रियों को दिखाई गई अपग्रेड सुविधाएं

मुंबई। मध्य रेलवे ने भारतीय रेल की प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक ट्रेन डेक्कन क्वीन एक्सप्रेस (12123/12124) का ट्रेन महोत्सव छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर धूमधाम से मनाया। यह कार्यक्रम 27 मार्च को आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में यात्री, रेलवे अधिकारी, रेल प्रेमी और आम नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान डेक्कन क्वीन की समृद्ध विरासत और इसके ऐतिहासिक सफर को याद करते हुए उत्सव का माहौल बना रहा।

रेलवे के अनुसार महोत्सव की शुरुआत ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय शाम 5:10 बजे से लगभग एक घंटे पहले हुई। इस अवसर पर डेक्कन क्वीन को आकर्षक फूलों से सजाया गया, जिससे उसकी शाही पहचान और भी निखरकर सामने आई। कार्यक्रम के दौरान एक विशेष ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी दिखाई गई, जिसमें वर्ष 1930 से अब तक डेक्कन क्वीन की यात्रा और भारतीय रेलवे में इसके योगदान को प्रभावशाली तरीके से प्रदर्शित किया गया।

महोत्सव के दौरान यात्रियों को डेक्कन क्वीन में उपलब्ध कराई गई नई और उन्नत सुविधाओं की भी जानकारी दी गई। रेलवे ने बताया कि ट्रेन के डाइनिंग कार को नए रूप में तैयार किया गया है, जिसमें आधुनिक फर्नीचर, बेहतर इंटीरियर और हेरिटेज लुक को बनाए रखते हुए आकर्षक सजावट की गई है। इसके अलावा कोचों के शौचालयों को भी बेहतर बनाया गया है, जहां विनाइल फ्लोरिंग, ड्यूरो वाइप मैट और साबुन व टिशू डिस्पेंसर जैसी आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई हैं।

रेलवे के अनुसार एसी चेयर कार में सीटिंग व्यवस्था को भी अपग्रेड किया गया है। नए सीट कवर लगाए गए हैं और कोच के दरवाजों के आसपास के हिस्सों को भी बेहतर रूप दिया गया है। वहीं ट्रेन के अंदरूनी हिस्सों में छत और पैनल बोर्ड को आकर्षक थीम के साथ नया स्वरूप प्रदान किया गया है। यात्रियों के लिए यात्रा को और अधिक आरामदायक बनाने हेतु कोचों में एयर फ्रेगरेंस डिस्पेंसर भी लगाए गए हैं।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि डेक्कन क्वीन का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। यह ट्रेन पहली बार दो रेक के साथ शुरू की गई थी, जिनमें प्रत्येक में सात कोच थे। एक रेक सिल्वर रंग में लाल बॉर्डर के साथ तथा दूसरा रॉयल ब्लू रंग में सुनहरी रेखाओं के साथ तैयार किया गया था। शुरुआती कोचों के अंडरफ्रेम इंग्लैंड में बने थे, जबकि कोच बॉडी माटुंगा वर्कशॉप में तैयार की गई थी। वर्ष 1966 में इन कोचों को इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, पेरंबूर में निर्मित स्टील बॉडी इंटीग्रल कोचों से बदला गया। समय के साथ ट्रेन के कोचों की संख्या बढ़ाकर 12 की गई और वर्ष 1995 में नए एयर ब्रेक रेक लगाए गए।

मध्य रेलवे ने बताया कि 15 अगस्त 2021 से मुंबई-पुणे डेक्कन क्वीन के साथ विस्टाडोम कोच भी जोड़ा गया, जिससे यात्रियों को पश्चिमी घाट की सुंदर वादियों का मनोरम दृश्य देखने का विशेष अवसर मिला। इसके बाद जून 2022 में ?प्रोजेक्ट उत्कृष्ट? के तहत डेक्कन क्वीन के पारंपरिक कोचों को एलएचबी कोचों से बदल दिया गया, जिनमें एलईडी लाइट, बायो टॉयलेट और ब्रेल साइनेज जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। वर्तमान में डेक्कन क्वीन 16 कोचों के साथ संचालित होती है, जिसमें एसी चेयर कार, सेकंड क्लास चेयर कार, विस्टाडोम कोच, डाइनिंग कार, जनरल कोच तथा जनरेटर कार शामिल हैं।

रेलवे ने बताया कि डेक्कन क्वीन को कई मामलों में भारत की पहली ट्रेन होने का गौरव प्राप्त है। इसमें पहली बार रोलर बेयरिंग वाले कोच, 110 वोल्ट सिस्टम वाले सेल्फ जनरेटिंग कोच और फर्स्ट व सेकंड क्लास चेयर कार की शुरुआत की गई थी।

डेक्कन क्वीन की सबसे खास पहचान इसका डाइनिंग कार है। रेलवे के अनुसार यह भारत की एकमात्र चलती ट्रेन है, जिसमें समर्पित डाइनिंग कार उपलब्ध है और यात्रियों को टेबल सर्विस दी जाती है। इसमें आधुनिक पेंट्री सुविधाएं जैसे माइक्रोवेव, डीप फ्रीजर और टोस्टर आदि उपलब्ध हैं, जबकि इंटीरियर को कुशन सीटिंग और कारपेटेड फर्श के साथ प्रीमियम बनाया गया है।

इस अवसर पर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक प्रतीक गोस्वामी, मुंबई मंडल के मंडल रेल प्रबंधक हिरेश मीना, प्रधान मुख्य यांत्रिक अभियंता सुबोध कुमार सागर, मुख्यालय एवं मुंबई मंडल के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी, मीडिया प्रतिनिधि, रेल प्रेमी और बड़ी संख्या में यात्री उपस्थित रहे।

मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला