बर्रो वाले बाबा भगवान आदिनाथ स्वामी के नये मंदिर पर शिखर एवं ध्वज स्थापना, प्रथम मस्तकाभिषेक में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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विदिशा से शोभित जैन की रिपोर्ट

। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के उपरांत निर्यापक मुनि श्री संभवसागर महाराज, मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज एवं मुनि श्री संस्कार सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में बर्रो वाले बाबा भगवान आदिनाथ स्वामी के नवनिर्मित मंदिर पर पाँच शिखरों की स्थापना एवं मंदिर शिखर पर पीतल के ध्वज दंड की प्रतिष्ठा विधिवत सम्पन्न हुई।
इस पावन अवसर पर भगवान आदिनाथ स्वामी का प्रथम मस्तकाभिषेक किया गया तथा विश्व शांति की मंगलभावना से मुनि श्री के मुखारविंद से शांति धारा संपन्न हुई। प्रथम अभिषेक के दर्शन हेतु श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरे परिसर में भक्ति व उत्साह का वातावरण छाया रहा।प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि पंचकल्याणक महोत्सव के पश्चात प्रथम अभिषेक को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। मंदिर के ऊपर शिखर एवं ध्वजारोहण का दृश्य अत्यंत भावपूर्ण और श्रद्धामय रहा प्रथम दो कलश स्थापना अशोक सागर एवं अनिरुद्ध सराफ, अभय वैद्य,संतोष गिरनार, पंकज बड़ाघर ने स्थापित किये तथा ध्वजारोहण मोहन नमकीन ने किया इस अवसर पर जैन महाविद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पंचकल्याणक समिति के स्वागताध्यक्ष संजय सेठ ने मुनिसंघ के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि विदिशा भद्दिलपुर भगवान शीतलनाथ स्वामी के चार कल्याणकों से पवित्र भूमि रही है, किन्तु गुरुदेव की कृपा से जैन महाविद्यालय की यह भूमि भी पंचकल्याणक से पावन हो गई है।अपने आशीर्वचन में मुनि श्री संभवसागर महाराज ने कहा कि इन सभी कार्यों के लिये आचार्य गुरुदेव ऊपर से ही हमें प्रेरणा दे रहे थे तथा आचार्य श्री का आशीर्वाद था सभी कार्य निर्विघ्न होते चले गये उन्होंने कहा कि मंदिर कितना ही भव्य क्यों न हो, बिना शिखर के वह अधूरा माना जाता है। इसी प्रकार धर्म और साधना के बिना मनुष्य जीवन भी अधूरा है। उन्होंने कहा कि जैसे मंदिर का शिखर सबसे ऊँचा होता है, वैसे ही जीवन का लक्ष्य आत्मकल्याण और मोक्ष प्राप्ति होना चाहिए।
मुनि श्री ने आगे कहा कि मंदिर का शिखर और ध्वज समाज की उन्नति एवं विजय के प्रतीक हैं। जैसे शिखर आकाश की ऊँचाइयों को स्पर्श करता है, वैसे ही हमें अपने विचार, आचरण और आत्मा को भी उच्चतम स्तर तक ले जाने का प्रयास करना चाहिए, कार्यक्रम में शिखर स्थापना एवं ध्वजारोहण करने वाले परिवारों सहित बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी बंधु उपस्थित रहे।