नीलांजना की आकस्मिक मृत्यु देखकर प्रभु को हुआ वैराग्य, लिया दीक्षा का निर्णय" : मुनि श्री संभवसागर महाराज 


विदिशा से शोभित जैन की रिपोर्ट


?नीलांजना का दृश्य देखा, उसकी आकस्मिक मृत्यु और संसार की असारता का भान हुआ, तब प्रभु ने दीक्षा लेकर वन की ओर गमन किया।?
ये उद्गार निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत दीक्षा कल्याणक के अवसर पर व्यक्त किए।मुनि श्री ने बर्रो वाले बाबा के नए मंदिर में प्रवेश की घटना को कुंडलपुर के बड़े बाबा मंदिर की ऐतिहासिक घटना से जोड़ते हुए कहा कि जब बर्रो वाले बाबा को क्रेन के माध्यम से उठाने का प्रयास किया जा रहा था, तब दोपहर तीन बजे से लगातार प्रयास किए गए, लेकिन बाबा अपने स्थान से टस से मस नहीं हुए।समय लगभग पाँच बजे का हो रहा था, तभी एक अनजान व्यक्ति ने आकर उनके कान में कहा कि ?बर्रो वाले बाबा केवल आचार्य विद्यासागर जी की ही बात सुनते हैं, उन्हें स्मरण करो।?मुनि श्री ने बताया कि जैसे ही उन्होंने आचार्य गुरुदेव का स्मरण किया, उसी क्षण बाबा अपने आसन से हिल गए और उनका गगन विहार प्रारंभ हो गया। यह दृश्य उसी प्रकार था जैसा कुंडलपुर में बड़े बाबा के गगन विहार के समय देखने को मिला था। इस अद्भुत दृश्य को केवल विदिशा के श्रद्धालुओं ने ही नहीं, बल्कि यूट्यूब चैनलों के माध्यम से हजारों लोगों ने भी देखा।जब सूर्य अस्ताचल की ओर बढ़ रहा था,उसी समय बर्रो वाले बाबा नए मंदिर में प्रवेश कर रहे थे। उस समय बाबा की छवि कुछ अलग ही दिखाई दे रही थी।मुनि श्री ने कहा कि पंचकल्याणक के प्रारंभिक दो दिनों?गर्भ कल्याणक और जन्म कल्याणक?में भक्ति का उतना सैलाब नहीं आता, लेकिन बर्रो वाले बाबा के गगन विहार के बाद श्रद्धालुओं की भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। जिस दृश्य को देखने के लिए लोग वर्षों से उत्सुक थे, वह दृश्य सभी को देखने को मिला और उस भक्ति भाव को सभी ने अपने अंतर्मन में संजो लिया।उन्होंने कहा कि इतने कम समय में सभी कार्य निरंतर और निर्विघ्न गुरुदेव के आशीर्वाद से आगे बढ़ रहे हैं। गुरुदेव हमेशा कहते थे कि अपना कर्तव्य करते रहो, यह मत सोचो कि हम ही कार्य करने वाले हैं। बड़े बाबा के भक्त केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि देव भी हैं, जो ऐसे आयोजनों को सफल बनाने में अदृश्य रूप से सहयोग करते हैं।मुनि श्री ने कहा कि बर्रो वाले बाबा के भक्त तो दिखाई दे रहे थे, लेकिन उनके अनगिनत अदृश्य भक्त भी वहां उपस्थित थे, जिन्होंने इस कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न कराया।
उन्होंने बताया कि जब सुबह नए मंदिर में जाकर बर्रो वाले बाबा के दर्शन किए, तो ऐसा लगा मानो बाबा मुस्करा रहे हों। नए मंदिर में उनकी मुस्कान कुछ अलग ही प्रतीत हो रही थी। अभी बाबा अकेले विराजमान हैं, लेकिन पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के बाद नव प्रतिष्ठित सभी भगवान भी उनके साथ समवसरण में विराजित होंगे।मुनि श्री ने कहा कि वे यहां केवल पंद्रह दिन के लिए समवसरण मंदिर की ?चाबी? रखने आए थे, लेकिन गुरुदेव के आशीर्वाद से जो कार्य अधूरे थे, वे सभी पूर्णता की ओर बढ़ रहे हैं और बर्रो वाले बाबा का नए मंदिर में विराजमान होना उनके लिए अत्यंत सुखद अनुभूति है।इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज एवं मुनि श्री संस्कार सागर महाराज मंचासीन थे।
प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी विनय भैया एवं तरुण भैया (इंदौर) ने भगवान के दीक्षा कल्याणक की पूजा संपन्न कराई।
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि दीक्षा कल्याणक के अवसर पर जबलपुर से श्राविका आश्रम की कई बहनें उपस्थित हुईं। उन्होंने मुनिसंघ के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
दोपहर में आदिकुमार की बारात, राजपाट, राज्य व्यवस्था और प्रजा पालन के दृश्य प्रस्तुत किए गए। इसी दौरान राजदरबार में स्वर्ग की अप्सरा नीलांजना का नृत्य चल रहा था। नृत्य करते-करते अचानक उसकी आयु पूर्ण हो जाती है। देवताओं ने रंग में भंग न हो इसलिए तुरंत दूसरी नर्तकी भेज दी, लेकिन आदिकुमार संसार की असारता समझकर वैराग्य को प्राप्त हो जाते हैं।
वन गमन के दृश्य के पश्चात विधीनायक प्रतिमा पर मुनि श्री द्वारा संस्कार संपन्न किए गए। पंचकल्याणक के पात्र, कलाकारों की टीम और संगीत के साथ इन दृश्यों की प्रस्तुति प्रतिष्ठाचार्य के निर्देशन में की गई, जिसे देखकर उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।
प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि 15 मार्च (रविवार) को केवलज्ञान कल्याणक मनाया जाएगा। प्रातःकाल मुनि आदिकुमार की आहारचर्या संपन्न होगी तथा मध्याह्न में भगवान को केवलज्ञान की प्राप्ति के साथ समवसरण की रचना होगी। समवसरण में मुनिसंघ विराजमान होगा और भगवान की दिव्य वाणी सभी दिशाओं में प्रसारित होगी।
पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष राजेश बोहरा, महामंत्री अनिरुद्ध सराफ, कोषाध्यक्ष अभय वैद्य, अनिल हजारी, स्वागताध्यक्ष संजय सेठ, दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष बड़ू चौधरी, शीतलधाम के अध्यक्ष सचिन वसंत जैन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय भंडारी एवं महामंत्री मोहन जैन ने विदिशा नगर के सभी श्रद्धालुओं से रविवार को केवलज्ञान कल्याणक एवं सोमवार को अंतिम दिवस मोक्ष कल्याणक के अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पधारने की अपील की है।