ऑपरेशन ‘नन्हे फरिश्ते’ के तहत अजमेर मंडल में 235 बच्चों को किया गया रेस्क्यू

अजमेर। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा चलाए जा रहे मानवीय अभियान 'ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते' के तहत अजमेर मंडल में पिछले एक वर्ष के दौरान बड़ी सफलता मिली है। इस अभियान के अंतर्गत आरपीएफ ने वर्ष 2025 में ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों से कुल 235 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें उनके परिवारों या संबंधित संस्थाओं के सुपुर्द किया।

अजमेर मंडल में यात्रियों की सुरक्षा और रेल परिसर में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल द्वारा कई विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनमें ऑपरेशन 'नन्हे फरिश्ते' प्रमुख है। इस अभियान का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में संकटग्रस्त, लापता, घर से भागे हुए या तस्करी के खतरे में पड़े बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित बचाना है।

मंडल सुरक्षा आयुक्त दीपक कुमार आजाद के निर्देशन में अजमेर मंडल की सभी आरपीएफ पोस्टों ने इस अभियान को प्रभावी ढंग से चलाते हुए वर्ष 2025 के दौरान 235 बच्चों को रेस्क्यू किया। रेस्क्यू किए गए बच्चों को नियमानुसार सरकार द्वारा अधिकृत एनजीओ, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) तथा उनके परिजनों को सौंप दिया गया।

आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार रेस्क्यू किए गए बच्चों में अधिकांश बच्चे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के रहने वाले पाए गए। इनमें से कई बच्चे घर से भटककर स्टेशन पहुंच गए थे, जबकि कुछ बच्चे संदिग्ध परिस्थितियों में पाए गए, जिन्हें समय रहते सुरक्षित बचा लिया गया।

ऑपरेशन 'नन्हे फरिश्ते' भारतीय रेलवे की एक महत्वपूर्ण मानवीय पहल है, जिसे वर्ष 2018 में शुरू किया गया था। इसके तहत आरपीएफ के जवान रेलवे परिसर में अकेले या संदिग्ध परिस्थितियों में घूम रहे बच्चों पर नजर रखते हैं और उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू कर संबंधित एजेंसियों के हवाले करते हैं। बाद में काउंसलिंग और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चों को उनके माता-पिता या अभिभावकों तक सुरक्षित पहुंचाया जाता है।

यह अभियान न केवल बच्चों को मानव तस्करी, बाल श्रम और शोषण जैसे अपराधों से बचाने में मददगार साबित हो रहा है, बल्कि बिछड़े हुए बच्चों को उनके परिवारों से मिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।