धनराशि घोटाले की शिकायत के बाद नया मोड़- ग्राम प्रधान ने सचिव को हटाने की कर दी मांग

फर्जी हस्ताक्षरों से 4 लाख का खेल? विकास के नाम पर बड़ा घोटाला!

धनराशि घोटाले की शिकायत के बाद नया मोड़- ग्राम प्रधान ने सचिव को हटाने की कर दी मांग

हरदोई /अहिरोरी:

विकास खंड अहिरोरी की ग्राम पंचायत गोपालपुर से सामने आया एक मामला अब पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षरों के सहारे लगभग ₹4 लाख रुपये का भुगतान निकाल लिया गया। इस पूरे मामले को लेकर ग्राम पंचायत की वर्तमान सचिव आकांक्षा सिंह ने खंड विकास अधिकारी (BDO) अहिरोरी को लिखित शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

🔎 क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता पंचायत सचिव के मुताबिक दिसंबर और जनवरी माह की सप्लाई के नाम पर भुगतान तैयार किया गया था। लेकिन जब बैंक से जानकारी ली गई तो पता चला कि करीब ₹4,00,000 रुपये ?रियाज वस्त्र भंडार? के खाते में ट्रांसफर दिखाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि सचिव का कहना है कि न तो उन्होंने ऐसा कोई भुगतान किया और न ही उस पर उनके हस्ताक्षर हैं। यानी सीधा आरोप है कि फर्जी हस्ताक्षरों के सहारे सरकारी धनराशि निकाल ली गई।

⚠️ शिकायत में क्या कहा गया?

शिकायत के अनुसार यह भुगतान पूर्व सचिव अंशुमान सिंह और ग्राम प्रधान गोपालपुर के संयुक्त हस्ताक्षरों से निकाला गया बताया जा रहा है। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब 4 लाख रुपये की इस राशि में जनवरी माह का भुगतान भी शामिल है, जबकि उसी समय नवीन सचिव की तैनाती हो चुकी थी। ऐसे में शिकायतकर्ता सचिव का कहना है कि जनवरी माह का भुगतान पूर्व सचिव द्वारा किया जाना संभव ही नहीं था।

❗ शिकायत के बाद कहानी में नया मोड़

सूत्रों के मुताबिक 16 फरवरी 2026 को सचिव आकांक्षा सिंह ने BDO अहिरोरी को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जांच की मांग की। लेकिन इसके बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। बताया जा रहा है कि सिर्फ 9 दिन बाद यानी 25 फरवरी 2026 को ग्राम प्रधान गोपालपुर द्वारा मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को शिकायत पत्र भेजकर उसी सचिव को पद से हटवाने की मांग कर दी गई। यहीं से अब एक और बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या सचिव पर गंभीर षड्यंत्र के तहत आरोप लगाकर इन सभी तथ्यों को दबाने या छिपाने की कोई कोशिश तो नहीं की जा रही? इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

🔥 जनता के बीच उठ रहे बड़े सवाल

आखिर फर्जी हस्ताक्षर किसने किए? 4 लाख रुपये किसके इशारे पर निकले? क्या विकास के नाम पर पंचायतों में चल रहा है कोई बड़ा खेल?

अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला सिर्फ एक ग्राम पंचायत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंचायतों में होने वाले सरकारी भुगतान की पूरी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

✍️ अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं।

जनता का सवाल साफ है-

?विकास के नाम पर आने वाला पैसा आखिर जा कहाँ रहा है??