अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डॉ. कंचन जैन 'मातृभाषा रत्न' की मानद उपाधि से नेपाल में सम्मानित

काठमांडू/अलीगढ़। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में नेपाल की प्रतिष्ठित संस्था 'शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन' द्वारा अलीगढ़, उत्तर प्रदेश की प्रख्यात विदुषी डॉ. कंचन जैन को "मातृभाषा रत्न" की मानद उपाधि से विभूषित किया गया है। उन्हें यह सम्मान मातृभाषा की सेवा, संरक्षण और साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।
संस्था के अध्यक्ष आनंद गिरि 'मायालु' ने डॉ. कंचन जैन की सराहना करते हुए कहा कि उनका लेखन और व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणापुंज है। उन्होंने सीमाओं से परे जाकर भाषा की सेवा की है, जो अत्यंत प्रशंसनीय है। डॉ. कंचन जैन का नाम समकालीन साहित्य और भाषा सेवा में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। फाउंडेशन द्वारा जारी इस प्रशस्ति पत्र में उल्लेख किया गया है कि डॉ. कंचन जैन ने न केवल शब्दों को कागज़ पर उतारा है, बल्कि अपनी रचनाओं और प्रयासों के माध्यम से मातृभाषा की जड़ों को सींचने का काम किया है।
समारोह के दौरान डिजिटल माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने डॉ. कंचन जैन के कृतित्व की सराहना की। यह सम्मान उन्हें उनकी निरंतर सक्रियता, भाषाई शुद्धता के प्रति आग्रह और वैश्विक स्तर पर हिंदी एवं अपनी मातृभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए दिया गया है।
अध्यक्ष एवं चयन समिति ने की मुक्तकंठ से प्रशंसा
संस्था के अध्यक्ष और चयन समिति के प्रमुख ने डॉ. कंचन जैन की इस उपलब्धि पर विशेष वक्तव्य जारी कर उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
चयन समिति की प्रमुख मंजू खरे 'दतिया' ने भी डॉ. कंचन जैन के कृतित्व को अतुलनीय बताते हुए कहा कि 'मातृभाषा रत्न' जैसी उपाधि उनके जैसे समर्पित साधक के लिए पूर्णतः न्यायसंगत है। उन्होंने भारत देश का नाम एक बार फिर से गर्व से ऊंचा किया है। जैसा कि सर्वविदित है डॉ. कंचन जैन को पूर्व में भी अनेक बार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि से न केवल जिला अलीगढ़ एवं संपूर्ण उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे साहित्यिक जगत में हर्ष की लहर है। विभिन्न सामाजिक व साहित्यिक संस्थाओं ने डॉ. कंचन जैन को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी है।