गुजरात में भारतीय रेलवे के रिकॉर्ड निवेश से अवसंरचना विकास को नई रफ्तार

गुजरात में भारतीय रेलवे के रिकॉर्ड निवेश से अवसंरचना विकास को नई रफ्तार

₹17,366 करोड़ का ऐतिहासिक आवंटन: कनेक्टिविटी और सुरक्षा का होगा विस्तार

सुरक्षा, बुलेट ट्रेन और आधुनिक स्टेशनों से राज्य में रेल परिवहन का नया युग

भारतीय रेलवे ने गुजरात में रिकॉर्ड बजटीय आवंटन और तीव्र अवसंरचना विकास के माध्यम से रेल परिवहन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ₹17,366 करोड़ के ऐतिहासिक बजट आवंटन के साथ राज्य में आधुनिक, सुरक्षित और यात्री-केंद्रित रेल नेटवर्क के विकास को अभूतपूर्व गति मिली है।

वर्ष 2009?14 के दौरान गुजरात के लिए औसत वार्षिक रेल बजट आवंटन ₹589 करोड़ था, जो वर्ष 2026?27 में बढ़कर ₹17,366 करोड़ हो गया है। यह लगभग 29 गुना वृद्धि राज्य में कनेक्टिविटी, क्षमता विस्तार और रेल अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

गुजरात में वर्तमान में ₹1,28,748 करोड़ की लागत से रेलवे अवसंरचना परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इनमें नई रेल लाइनों का निर्माण, स्टेशनों का पुनर्विकास तथा प्रमुख सुरक्षा उन्नयन शामिल हैं, जो दीर्घकालिक क्षमता वृद्धि और परिचालन दक्षता सुनिश्चित करेंगे।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतर्गत पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और पंजाब को जोड़ता है। सूरत में पूर्वी और पश्चिमी फ्रेट कॉरिडोर को जोड़ा जाएगा तथा वहां एक महत्वपूर्ण जंक्शन विकसित किया जाएगा।

यह पूर्व?पश्चिम कॉरिडोर गुजरात के पश्चिमी तट के बंदरगाहों को देश के विभिन्न राज्यों से जोड़ेगा। इसके माध्यम से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को भी बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी।

गुजरात ने 100% रेल विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। राज्य में 87 स्टेशनों पर निर्माण कार्य जारी है। अहमदाबाद?मुंबई हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना तीव्र गति से प्रगति कर रही है। दूसरी सुरंग की ब्रेकथ्रू प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण होगी तथा व्यावसायिक संचालन अगले वर्ष प्रारंभ करने का लक्ष्य निर्धारित है। प्रधानमंत्री के सतत मार्गदर्शन और नियमित समीक्षा के अंतर्गत टीम निरंतर कार्यरत है।

बुलेट ट्रेन परियोजना देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें आधुनिक निर्माण तकनीक, उन्नत प्रौद्योगिकी और विशेष ट्रैक प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।

अमृत स्टेशन योजना के तहत गुजरात के 87 रेलवे स्टेशनों को ₹6,058 करोड़ की लागत से व्यापक पुनर्विकास हेतु चिन्हित किया गया है। इनमें से 19 स्टेशनों- सामाख्याली, डाकोर, हापा, जाम जोधपुर, मोरबी, ओखा, पालीताना और पोरबंदर सहित का पुनर्विकास कार्य पूर्ण हो चुका है। इससे यात्री सुविधाओं और स्टेशनों की सौंदर्यात्मक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

आधुनिक ट्रेन सेवाओं की शुरुआत से गुजरात में यात्रियों की सुविधा और यात्रा दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में राज्य में संचालित हैं:

6 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें

1 अमृत भारत एक्सप्रेस

1 नमो भारत एक्सप्रेस

ये सेवाएं यात्रियों को तेज़, सुरक्षित और अधिक आरामदायक यात्रा विकल्प प्रदान कर रही हैं।

वर्ष 2014 के बाद से गुजरात के रेलवे नेटवर्क का तीव्र विस्तार हुआ है। लगभग 2,900 किलोमीटर नई रेलवे लाइनें बिछाई गई हैं, जो कई यूरोपीय देशों के कुल रेल नेटवर्क से अधिक है। राज्य में 4,005 किलोमीटर रेल मार्गों का 100% विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है, जिससे हरित और ऊर्जा-कुशल संचालन सुनिश्चित हुआ है।

इसके अतिरिक्त, लेवल क्रॉसिंग समाप्त करने के उद्देश्य से 1,177 फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए हैं, जिससे सुरक्षा में वृद्धि और सड़क-रेल यातायात में सुगमता आई है।

रेल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारतीय रेलवे गुजरात में स्वदेशी ?कवच? ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लागू कर रहा है। स्वीकृत 1,842 रूट किलोमीटर में से 96 रूट किलोमीटर पर कवच स्थापित किया जा चुका है, जबकि 1,674 रूट किलोमीटर पर कार्य प्रगति पर है। यह रेल सुरक्षा मानकों में महत्वपूर्ण उन्नति को दर्शाता है।

रिकॉर्ड निवेश, आधुनिक स्टेशन, प्रीमियम ट्रेन सेवाएं, पूर्ण विद्युतीकरण और उन्नत सुरक्षा प्रणालियों के साथ भारतीय रेलवे गुजरात के अवसंरचना विकास और समग्र सामाजिक-आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।