फर्जी ऋण पुस्तिका बनाकर बैंक से लोन हड़पने का मामला: 3-3 साल की सजा बरकरार

जांजगीर-चांपा।फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार कर भू-अभिलेखों में छेड़छाड़ कर बैंक से लोन हड़पने के चर्चित मामले में अपीलीय न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए दोषियों की सजा बरकरार रखी है। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश प्रियंका अग्रवाल ने 14 अक्टूबर 2025 को पारित निर्णय में आरोपियों की अपील खारिज कर दी।

मामला थाना बिर्रा अंतर्गत ग्राम तालदेवरी से जुड़ा है। प्रार्थी नम्मूलाल पटेल ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी पैतृक 2.5 एकड़ भूमि, स्थित ग्राम देवरानी, तहसील बम्हनीडीह, के संबंध में पटवारी हल्का-11 सिलादेही दयाराम साहू ने अपने सहयोगी ताराचंद पटेल के साथ मिलकर फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार की।

शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने तहसीलदार एवं राजस्व निरीक्षक के नकली हस्ताक्षर व सील का उपयोग कर परमानंद कर्ष के नाम से ऑनलाइन भू-अभिलेख तैयार किए। इन जाली दस्तावेजों के आधार पर बैंक से ऋण प्राप्त कर आर्थिक लाभ उठाया गया।

प्रकरण में थाना बिर्रा में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (महत्वपूर्ण दस्तावेज की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) तथा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत अपराध दर्ज किया गया।

विचारण न्यायालय ने साक्ष्यों और दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर पाया कि पटवारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए डिजिटल हस्ताक्षर का प्रयोग कर जालसाजी की और सरकारी अभिलेखों में अवैध परिवर्तन किया। इसे गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए दोनों आरोपियों दयाराम साहू एवं परमानंद कर्ष को विभिन्न धाराओं में 3-3 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।

अपीलीय न्यायालय ने भी अभियोजन पक्ष के तर्कों और प्रस्तुत साक्ष्यों से संतुष्ट होते हुए कहा कि फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से आर्थिक अपराध सिद्ध होता है। फलस्वरूप, दोषियों की अपील निरस्त करते हुए निचली अदालत की सजा को यथावत रखा गया।

यह फैसला राजस्व अभिलेखों में पारदर्शिता और डिजिटल दस्तावेजों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है।

Citiupdate के लिए समीर खूंटे की रिपोर्ट...