शब-ए-बारात पर हरदोई में इबादत का माहौल, बावन की जामा मस्जिद में जलसे का आयोजन, कब्रिस्तान में पढ़ी गई फातिहा

हरदोई जिले में शब-ए-बारात के मौके पर पूरी रात रौनक और इबादत का माहौल बना रहा। मुस्लिम बस्तियों में देर रात तक चहलकदमी होती रही। लोगों ने अपने घरों और मस्जिदों में नमाज़, तिलावत और ज़िक्रो-अज़कार किया। कब्रिस्तानों में पहुंचकर बुजुर्गों और दुनिया से रुख़्सत हो चुके लोगों के लिए फातिहा पढ़ी गई और मग़फिरत की दुआएं मांगी गई।
बावन कस्बे की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में शब-ए-बारात के अवसर पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जलसे का आयोजन किया गया। जलसे में उलेमाओं ने अल्लाह और रसूलुल्लाह ﷺ के बताए रास्ते पर चलने की तालीम दी। तालिबे इल्म छोटे बच्चों ने नात शरीफ पेश कर महफिल को रूहानी रंग में रंग दिया। बच्चों द्वारा लाइलाह इललल्लाह, या नबी सलाम अलैका और क्या बताऊं मदीना क्या है, जैसी नातों पर माहौल खुशनुमा और नूरानी हो उठा।
तालिबे इल्म मोहम्मद याह्या ने, हो ज़िंदगी तमाम शाहे दो जहां के नाम नात पेश की। हज़रत मौलाना व मुफ्ती मोहम्मद फैज़ सीतापुर ने ज़िंदगी में कितने ही आए कांटे और फूल, छूटने न पाए दामने रसूल पढ़ते हुए कुरआन और सुन्नत से जुड़े रहने का संदेश दिया। मौलाना व मुफ्ती मसीकुल्ला ने कुरआन-हदीस की रोशनी में तकब्बुर और घमंड से बचने की नसीहत की।
निज़ामत मौलाना जावेद ने की, जबकि उलेमाओं का इस्तक़बाल मौलाना याह्या ने किया। हाफ़िज़ अरकम सीतापुरी ने नात पढ़ी, दुश्मन को भी आका ने सीने से लगाया है। मौलाना वहाउद्दीन क़ासमी ने सदका, दुआ और रिज़्क़े हलाल पर विस्तार से रोशनी डाली।
कस्बे के नवाब सैयद अनीसुल हसन ने बच्चों के प्रयासों की सराहना की और महिलाओं से सुरक्षा व तालीम पर ध्यान देने की अपील की। जामा मस्जिद के सदर सैयद हाफ़िज़ उबैदुल्ला ने व्यवस्था व अनुशासन बनाए रखने की बात कही। सैयद कारी असजद ने दीन पर चलने का पैग़ाम दिया और सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।
आखिर में मौलाना व मुफ्ती मोहम्मद असद साहब ने ज़िक्र, इबादत, सच्चाई और नेक अमल पर बयान किया तथा देश में अमन-चैन और भाईचारे के लिए दुआ कराई। जलसे में सैयद सलाउद्दीन, सईद खान, अली अहमद खान, जकी खान, बाबू कुरैशी, हाफ़िज़ इरशाद कुरैशी, हाफ़िज़ एजाज़ कुरैशी, इरफान मंसूरी, अबूआला मंसूरी, फूलमियां खान, इजहार खान, अनीश खान, इख़लाक़ खान सहित सैकड़ों आशिक़े रसूल मौजूद रहे।