खामोश हो गया...असरदार ' वाणी पुत्र' 

खामोश हो गया...असरदार ' वाणी पुत्र'

बोलते-बोलते, एकाएक थम गई मुखर आवाज

#Hardoi
हे ईश्वर... ये क्या हो रहा? ये कैसा न्याय प्रभु आपका ? क्यों ऐसे दिन देखने पड़ रहे हैं प्रभु? ऐसा क्या गुनाह हुआ है हम सबसे? पहले वाणी पुत्र #प्रियंक_दीक्षित_दादा, फिर #अखिलेश_सिंह_दादा और अब #अरुणेश_बाजपेई_दादा का अवसान। महीने से भी कम समय में तीन-तीन वाणी पुत्रों के जीवन की डोर प्रभु आपने आसमान में बैठकर संभाल जरूर ली. लेकिन धरती पर तो आपने सन्नाटा बिखेर दिया। तीनों सरस्वती पुत्र, शब्द ब्रह्म की साधना में ही तो निमग्न थे। किसी को इल्म ही नहीं कि शब्द साधना करते-करते अक्षर विराम पा जाएंगे। बोलते-बोलते एकाएक अरुणेश बाजपेई दादा की मुखर आवाज भी वैसे ही थम गई, जैसे उनके दो समकक्ष साथियों की थम गई थी। अरुणेश बाजपेई दादा के निधन की खबर ने तो प्रहलाद नगरी हरदोई ही नहीं, समूचे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया। जिसने सुना,सन्नाटे में रह गया। ' बाजपेई दादा' की मृत्यु की खबर ने कानों को सुन और हृदय को हिलाकर रख दिया। अरुणेश बाजपेई दादा के रूप में एक असरदार ' वाणी पुत्र' खामोश हो गया। प्रभु पीछे छोड़ गया ये ' वाणी पुत्र' अपनी मनमोहक मुस्कान व मिलनसार व्यवहार...

बाजपेई दादा के निधन का समाचार बेहद पीड़ादायक है। हालांकि वो बीते कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया को किनारे किए हुए थे और बीते कुछ समय से बीमार भी थे..

ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और शोक-संतप्त परिवार को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति दे।