छुरा ब्रेकिंग: कुएं में मिला तेंदुए के शावक का शव, गांव में मचा हड़कंप, मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम

गरियाबंद,छुरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत टोनहीडबरी गांव में शनिवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब गांव से कुछ दूरी पर सड़क किनारे स्थित एक कुएं में लगभग एक वर्ष के तेंदुए का शावक मृत अवस्था में तैरता हुआ मिला। सुबह-सुबह ग्रामीण जंगल क्षेत्र में वन्य प्राणियों की मौजूदगी को लेकर चर्चा कर ही रहे थे कि इस घटना ने पूरे गांव में सनसनी फैला दी। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी गई।

मौके पर पहुंचे वन अमला

सूचना मिलते ही वन विभाग हरकत में आया। छुरा वन परिक्षेत्र के अधिकारियों के साथ ही जिला स्तर के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। गरियाबंद डीएफओ शासिका नंदन के., एसडीओ विकास चंद्राकर तथा छुरा वन परिक्षेत्र के रेंजर लव कुश पांडे ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। इससे पहले तड़के सुबह से ही बीट प्रभारी यादराम सिन्हा और कृष्ण कुमार साहू मौके पर मुस्तैदी से तैनात रहे। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने नियमानुसार पंचनामा कार्रवाई कर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की गई।

बताया गया कि उक्त कुआं टोनहीडबरी निवासी रायसिंह गोंडका है, जहां से तेंदुए के शावक के शव को बाहर निकाला गया। इसके बाद जिले से पहुंचे तीन वरिष्ठ पशु चिकित्सकों की टीम ने मौके पर ही पोस्टमार्टम कर मृत्यु के कारणों की जांच शुरू की। सभी कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद वन विभाग की टीम ने देर शाम शावक के शव का विधिवत अंतिम संस्कार किया।

घटना के बाद ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के वन क्षेत्रों में पहले भी तेंदुओं की गतिविधियां देखी जाती रही हैं, जिससे लोगों में भय बना रहता है। यह घटना छुरा के वनांचल क्षेत्र में पहली बार नहीं है, इससे पूर्व भी अलग-अलग समय पर इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

पीएम रिपोर्ट में होगा खुलासा

गरियाबंद मंडल के डीएफओ शासिका नंदन के. ने बताया कि तेंदुए का शावक लगभग 8 से 10 माह का प्रतीत होता है। आशंका है कि वह अपनी मां के साथ खेलते समय कुएं में गिर गया होगा और बाहर निकलने के प्रयास में संघर्ष के दौरान पानी में डूबने से उसकी मृत्यु हो गई। हालांकि, अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ पानी की तलाश में वन्य प्राणी ग्रामीण क्षेत्रों की ओर आ सकते हैं। इसे देखते हुए वन विभाग सतर्क है और क्षेत्र के सभी खुले कुओं एवं जलस्रोतों का घेराव करने की तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।