PM आवास में बड़ा फर्जीवाड़ा! अधूरे मकान को रिकॉर्ड में बताया पूर्ण, जियो टैगिंग के दम पर पूरी राशि निकालने का आरोप

CITIUPDATE NEWS(संतोष सारथी)प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में पारदर्शिता और गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच कोरबा जिले के करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बांधापाली से कथित अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है। हितग्राही अदम्बर दास (पिता- मंथीर दास) के नाम स्वीकृत आवास को शासकीय रिकॉर्ड और पीएम आवास पोर्टल में पूर्ण दर्शा दिया गया है, जबकि मौके पर मकान आज भी अधूरा है। उपलब्ध दस्तावेज इस मामले में कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। ज्योग्राफिकमैप्स और जीपीएस गाइड एक्सप्लोर करना


जानकारी के अनुसार सत्र 2024-25 में अदम्बर दास के नाम प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था। योजना के तहत 24 जून 2025 को प्रथम किश्त, 17 जुलाई 2025 को द्वितीय किश्त तथा 05 सितंबर 2025 को तृतीय किश्त जारी कर दी गई। इसके साथ ही निर्माण कार्य के नाम पर मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान भी किया जा चुका है। प्रधानमंत्री आवास पोर्टल का स्क्रीनशॉट तथा भुगतान संबंधी विवरण सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच स्पष्ट अंतर की ओर संकेत करते हैं। पोर्टल में आवास पूर्ण दिखाया गया है, जबकि मौके पर भवन अधूरा दिखाई देता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निर्माण पूरा हुए बिना अंतिम किश्त और अन्य भुगतान किस आधार पर स्वीकृत किए गए।

मामले में यह आशंका जताई जा रही है कि फर्जी जियो टैगिंग के माध्यम से निर्माण पूर्ण होने का रिकॉर्ड तैयार कर शासकीय राशि जारी कराई गई। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है तो यह न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि योजना की निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाएगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना में निर्माण कार्य का निरीक्षण, जियो टैगिंग, सत्यापन और किश्त जारी करने की प्रक्रिया तकनीकी सहायक, आवास मित्र, रोजगार सहायक तथा जनपद पंचायत के संबंधित अधिकारियों की निगरानी में होती है। ऐसे में अधूरे मकान को पूर्ण दर्शाए जाने से इन अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब मकान का निर्माण आज भी अधूरा है तो उसे पोर्टल में पूर्ण किसने दर्ज किया? जियो टैगिंग किस आधार पर की गई? भुगतान की अनुशंसा किसने की? और क्या पूरी प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया? यह मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यदि उपलब्ध दस्तावेजों और जमीनी स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित फर्जीवाड़े की परतें खुल सकती हैं।