गरीबी और संघर्ष को बनाया ताकत, प्राचीन इतिहास में 89 % से अधिक अंक हासिल कर विश्वविद्यालय में किया टॉप

आलापुर ( अम्बेडकर नगर )। प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती?इस कहावत को राजेसुल्तानपुर क्षेत्र के कालूपुर गांव की बेटी निधि उपाध्याय ने सच साबित कर दिखाया है। अत्यंत ग्रामीण और विपरीत परिस्थितियों में रहकर पढ़ाई करने वाली निधि ने डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के 31वें दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक हासिल कर अपने परिवार, महाविद्यालय और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया।

निधि ने प्राचीन इतिहास विषय में 89 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनकी इस असाधारण उपलब्धि पर 12 अगस्त को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजेंद्र विक्रम सिंह ने समारोहपूर्वक उन्हें स्वर्ण पदक प्रदान किया।

निधि की सफलता की कहानी संघर्ष, संकल्प और मेहनत की मिसाल है। बचपन में ही मां का साया सिर से उठ जाने के बाद उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखी। शिक्षा हासिल करने के लिए वह प्रतिदिन करीब 25 किलोमीटर साइकिल चलाकर महाविद्यालय पहुंचती थीं। खेत-खलिहान और ग्रामीण परिवेश से निकलकर विश्वविद्यालय की टॉपर बनने तक का उनका सफर क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गया है।

निधि ने पंडित राम शब्द स्मृति पीजी कॉलेज, बिशुनपुर बजदहा, जहांगीरगंज से स्नातक एवं परास्नातक स्तर की शिक्षा प्राप्त की। कॉलेज को गुणवत्तापरक एवं संस्कारवान शिक्षा के लिए जाना जाता है। निधि की उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि महाविद्यालय और पूरे जिले का गौरव बढ़ाया है।

निधि के पिता सुभाष चंद्र उपाध्याय गरीब किसान हैं। बेटी की इस सफलता पर वह गर्व से भर उठे हैं। निधि ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता और बहन को देते हुए कहा कि परिवार के सहयोग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

अत्यंत ग्रामीण परिवेश में रहने वाली निधि वर्तमान में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज और देश की सेवा करना है। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत करने का जज्बा हो तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकते।

निधि की उपलब्धि पर समाजसेवी योगेंद्रनाथ त्रिपाठी, कम्हरिया स्टेट के सुरेश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार कृष्णचंद्र दुबे, लालमणि गोंड, प्रबंधक रमेशचंद्र गुप्ता, ओंकार सिंह, समाजसेवी हीरामणि पांडेय, देवी प्रसाद पांडेय, कॉलेज प्रबंधक पंडित हौसला प्रसाद मिश्र, प्राचार्य शैलेश मिश्रा, प्रवक्ता इंद्रजीत शुक्ला सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोगों ने निधि को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

साइकिल की रफ्तार से विश्वविद्यालय की स्वर्णिम उपलब्धि तक पहुंची निधि की कहानी आज ग्रामीण भारत की उन बेटियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं।