घर गिराए जाने से बेघर हुई विधवा की आंखों से छलके आंसू, सामाजिक कार्यकर्ता ने मदद का दिया भरोसा

आलापुर (अंबेडकरनगर)।राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र के देवरिया लाला गांव में प्रशासन की ओर से कुछ दिन पूर्व प्रेमा देवी, रामवृक्ष समेत अन्य लोगों के मकान गिराए जाने के बाद पीड़ित परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। दर्जनों लोगों को मकान खाली करने के लिए 25 दिन की मोहलत दिए जाने की बात भी सामने आई है। शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी मित्रसेन यादव ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

मकान गिराए जाने के बाद प्रेमा देवी पत्नी स्वर्गीय विक्रम ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उनका परिवार सैकड़ों वर्षों से यहां रह रहा है। उन्हें जानकारी नहीं थी कि उनका आशियाना तालाब की जमीन पर बना हुआ है। पति की करीब आठ वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। वह मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। मकान गिरने के बाद अब उनके सामने बच्चों को लेकर रहने का संकट खड़ा हो गया है।

प्रेमा देवी ने बताया कि उनके परिवार में रवीना, रीना, अंजलि और लवकुश समेत अन्य सदस्य हैं। उनकी एक बेटी भी विधवा है। उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि आगे किसी का घर न गिराया जाए और प्रभावित परिवारों को रहने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। इस दौरान मकान के मलबे में छोटे बच्चे अपने खिलौने और जरूरी सामान तलाशते नजर आए। यह दृश्य देखकर पीड़ित परिवार की बेबसी साफ दिखाई दी।

?मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाते हैं?

रामविलास, रामवृक्ष, जगदीश, नकुल, गोविंद, रामनयन, रामसकल और अखिलेश आदि ने बताया कि वे लंबे समय से इस जमीन पर रहकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। मकान गिराए जाने की स्थिति में उनके सामने भीषण संकट पैदा हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से अपने आशियाने बचाने की मांग की।

सामाजिक कार्यकर्ता मित्रसेन यादव ने कहा कि पीड़ित परिवारों की हरसंभव मदद की जाएगी। उन्होंने सरकार से बुलडोजर कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने तथा प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समाधान कराने की मांग की। उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन सरकार की मंशा और निर्देशों के विपरीत कार्रवाई कर सरकार को बदनाम करने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि गरीब और बेसहारा परिवारों को उजाड़ने के बजाय उनकी समस्या का मानवीय आधार पर समाधान किया जाना चाहिए।