माल ढुलाई में भारतीय रेलवे की रफ्तार तेज, 12 साल में 52% बढ़ी लोडिंग; 2025-26 में 1,670 मिलियन टन पहुंची

भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए नई उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2014-15 में 1,098 मिलियन टन रही माल ढुलाई बढ़कर 2025-26 में 1,670 मिलियन टन पहुंच गई है। रेलवे की माल ढुलाई में यह वृद्धि लगभग 52 प्रतिशत है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने, गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल को बढ़ावा देने, वैगन निवेश योजनाओं और बेहतर प्रथम एवं अंतिम चरण की कनेक्टिविटी से माल परिवहन को गति मिली है।

रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में भारतीय रेलवे की माल ढुलाई से संबंधित यह जानकारी दी।

जीसीटी से मजबूत हुआ माल ढुलाई का ढांचा

भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने के लिए गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल नीति के तहत निजी निवेश को बढ़ावा दिया है। अब तक 142 गति शक्ति कार्गो टर्मिनल चालू किए जा चुके हैं। इनकी अनुमानित माल ढुलाई क्षमता करीब 224 मिलियन टन प्रतिवर्ष है। इन टर्मिनलों के माध्यम से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का निजी निवेश जुटाया गया है। वर्ष 2025-26 में इन टर्मिनलों से करीब 146 मिलियन टन माल का परिवहन हुआ।

रेलवे अपने माल गोदामों में भी बुनियादी सुविधाओं को विकसित और उन्नत कर रहा है, जिससे माल की लोडिंग-अनलोडिंग और परिवहन प्रक्रिया अधिक सुगम हो सके।

निजी निवेश से बढ़ी वैगनों की क्षमता

माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र को वैगन में निवेश के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की गई हैं। विशेष प्रकार के माल के परिवहन के लिए करीब 275 विशेष वैगन रेक और 397 सामान्य उद्देश्य वाले वैगन रेक परिचालन में हैं। इनके माध्यम से सीमेंट, फ्लाई ऐश, इस्पात उत्पाद, लौह अयस्क और कोयले सहित विभिन्न प्रकार के माल का परिवहन किया जा रहा है।

ऑटोमोबाइल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए भी अलग योजना लागू है, जिसके तहत उद्योगों के स्वामित्व वाले करीब 54 रेक परिचालन में हैं।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने बदली माल परिवहन की तस्वीर

माल ढुलाई में तेजी लाने में ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लुधियाना से सोननगर तक करीब 1,337 किलोमीटर लंबा ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और दादरी से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल तक करीब 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर अब पूरी तरह चालू हो चुके हैं।

दोनों माल गलियारों पर प्रतिदिन औसतन करीब 443 मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। इससे मालगाड़ियों की गति बढ़ी है, यात्रा और टर्नअराउंड समय में कमी आई है तथा पारंपरिक रेल नेटवर्क पर दबाव कम हुआ है। इसके परिणामस्वरूप रेलवे अपने मौजूदा नेटवर्क पर अतिरिक्त माल और यात्री सेवाएं संचालित करने में सक्षम हुआ है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के कारण डबल स्टैक कंटेनर ट्रेनों और अधिक एक्सल भार वाली मालगाड़ियों के संचालन को भी बेहतर सुविधा मिली है। इससे पश्चिमी बंदरगाहों से देश के उत्तरी क्षेत्रों तक माल की तेज आवाजाही संभव हुई है।

12 वर्षों में नए ट्रैक बिछाने की रफ्तार हुई लगभग दोगुनी

रेलवे नेटवर्क के विस्तार पर भी बड़े पैमाने पर काम किया गया है। वर्ष 2009-14 के दौरान जहां 7,599 किलोमीटर नए ट्रैक चालू किए गए थे, वहीं 2014-26 के दौरान 36,429 किलोमीटर नए ट्रैक चालू किए गए। नए ट्रैक चालू करने की औसत रफ्तार 4.2 किलोमीटर प्रतिदिन से बढ़कर 8.32 किलोमीटर प्रतिदिन हो गई है।

1 अप्रैल 2026 तक भारतीय रेलवे में करीब 40 हजार किलोमीटर लंबाई वाले 514 रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 8.31 लाख करोड़ रुपये है। इनमें 169 नई लाइन, 29 आमान परिवर्तन और 316 दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं।

2014 से लगातार बढ़ी माल ढुलाई

भारतीय रेलवे की माल ढुलाई में पिछले वर्षों के दौरान लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014-15 में 1,098 मिलियन टन से शुरू हुई लोडिंग 2021-22 में 1,418 मिलियन टन, 2022-23 में 1,512 मिलियन टन, 2023-24 में 1,591 मिलियन टन और 2024-25 में 1,617 मिलियन टन तक पहुंची। वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,670 मिलियन टन हो गया।

सरकार के अनुसार, टर्मिनल विकास, वैगन निवेश, तेज कार्गो सेवाओं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और बेहतर प्रथम एवं अंतिम चरण की कनेक्टिविटी जैसी पहलों से रेलवे के माल ढुलाई तंत्र को और मजबूती मिली है। इससे भारतीय रेलवे की माल परिवहन क्षमता बढ़ने के साथ ही लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में रेलवे की भूमिका भी मजबूत हुई है।