या हुसैन’’ की सदाओं से गूंजा शहर, देर रात तक ताज़ियों के मिलाप में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

फतेहपुर। चेहल्लुम के अवसर पर बुधवार को फतेहपुर शहर पूरी तरह ग़म-ए-कर्बला की याद में डूबा रहा। शहर के विभिन्न मोहल्लों से निकले ताज़िया व अलम के जुलूसों ने अकीदत, अनुशासन और भाईचारे की मिसाल पेश की। शाम ढलते ही बाकरगंज, कबाड़ी मार्केट समेत विभिन्न क्षेत्रों से लगभग दस ताज़िये अपने-अपने कदीमी रास्तों से अखाड़ों के साथ रवाना हुए। ढोल-ताशों की मातमी धुन, ष्या हुसैन की सदाओं और नौहाख्वानी के बीच जुलूस अपने निर्धारित मार्गों से होकर चाँदशाह चौक, लाला बाजार, सय्यद वाड़ा सहित प्रमुख मार्गों से गुजरते रहे। रात लगभग 10 बजे सभी ताज़िये बड़े तालाब स्थित निर्धारित स्थल पर पहुँचे, जहाँ पारंपरिक तरीके से ताज़ियों का मिलाप कराया गया। मिलाप का यह दृश्य बेहद भावुक और आकर्षक रहा। चारों ओर अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और लोगों ने इमाम हुसैन (अ.स.) व उनके 72 जांनिसार साथियों की शहादत को याद कर अश्कों के साथ खिराज-ए-अकीदत पेश की।
मिलाप सम्पन्न होने के बाद सभी ताज़िये अपने-अपने इमाम चौकों की ओर रवाना हुए, जहाँ जुलूसों का सकुशल समापन हुआ। देर रात तक शहर के विभिन्न मार्गों पर लोगों की भीड़ बनी रही। ताज़ियों और अलमों की एक झलक पाने के लिए बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में मौजूद रहे। पूरे क्षेत्र में अनुशासन और सौहार्द का वातावरण देखने को मिला। चेहल्लुम के मौके पर जगह-जगह अकीदतमंदों द्वारा खीर, शरबत, जर्दा और अन्य तबर्रुक का वितरण किया गया। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी श्रद्धालुओं की सेवा में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। पूरे आयोजन के दौरान लोगों ने शांतिपूर्ण माहौल में धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कमेटी अध्यक्ष चौधरी मोइन राइन व महासचिव वारिस उद्दीन एडवोकेट अपनी पूरी कमेटी के साथ देर रात तक सक्रिय रहे। उन्होंने ताज़ियों के समयबद्ध मिलाप, यातायात व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और अन्य व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की, जिसके चलते पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुआ।