देवपुरा स्कूल में 7 कमरे जर्जर घोषित, पीडब्ल्यूडी ने दी बैठने से मनाही, 4 साल बाद भी नहीं बने नए कमरे, 392 बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दांव पर

संवाददाता - संतोष व्यास

डूंगरपुर। जिले के ग्राम पंचायत बिछीवाड़ा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, देवपुरा में प्रशासनिक अनदेखी के कारण 392 विद्यार्थियों की पढ़ाई और सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। स्कूल को सीनियर सेकेंडरी का दर्जा मिले 4 साल बीत जाने के बाद भी यहाँ नए कक्षा-कक्षों का निर्माण नहीं हो सका है। जर्जर भवनों और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से क्षुब्ध होकर ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विद्यालय परिवार ने परिसर का जायजा लिया तथा विद्यालय की जर्जर स्थिति पर चिंता व्यक्त की।

- पीडब्ल्यूडी की चेतावनी के बाद बढ़ा संकट

निरीक्षण के दौरान सामने आया कि वर्तमान में विद्यालय के पास कुल 11 कक्षा-कक्ष उपलब्ध हैं। इनमें से 7 कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की तकनीकी टीम इन 7 कमरों को असुरक्षित घोषित करते हुए इनमें बच्चों को न बैठाने की सख्त हिदायत दे चुकी है। इसके चलते अब केवल 4 कमरों के भरोसे 392 विद्यार्थियों की कक्षाएं संचालित करने की नौबत आ गई है, जिससे अध्यापन कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

- पेजजल और शौचालय का भी अभाव

निरीक्षण दल ने पाया कि भवन के अलावा अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। बालिकाओं के लिए पृथक और पर्याप्त शौचालय का अभाव है, जिससे छात्राएं सहज महसूस नहीं करतीं। प्रार्थना स्थल पर नुकीले पत्थर निकले हुए हैं, जिससे आए दिन बच्चों के चोटिल होने का खतरा बना रहता है।

सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट गुलाब चंद्र ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित माहौल और बुनियादी सुविधाएं देना सरकार व प्रशासन का प्राथमिक कर्तव्य है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों व प्रशासन से नए भवन निर्माण, जर्जर कमरों के स्थान पर सुरक्षित कक्षाओं, शुद्ध पेयजल, बालिका शौचालय और प्रार्थना स्थल के समतलीकरण की मांग की।

इस दौरान एडवोकेट गुलाब चंद्र डोण, माधव लाल मेणात, पंकज भगोरा, अनिल बरंडा, जयंती भगोरा, प्रभुलाल मोलात, मुकेश मोडिया, कांतिलाल बरंडा, हरीश बोड़ात, कमजी बुझ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण व विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा।