मौसम की हर चुनौती पर भारी पड़ी आस्था, जयकारों से गूंजा माता वैष्णो देवी धाम

कटड़ा। त्रिकुटा पर्वत पर बदलते मौसम, रिमझिम बारिश और ठंडी हवाओं के बीच भी माता वैष्णो देवी के भक्तों की अटूट आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। हजारों श्रद्धालु पूरे जोश और श्रद्धा के साथ "जय माता दी" के जयकारे लगाते हुए पवित्र भवन की ओर बढ़ते रहे। खराब मौसम के बावजूद यात्रा पूरी तरह सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारू रूप से जारी रही।

श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ी राहत यह रही कि करीब 12 दिनों बाद बैटरी कार मार्ग दोबारा खोल दिया गया। लगातार बारिश और सुरक्षा कारणों से बंद इस मार्ग के शुरू होने से बुजुर्गों, दिव्यांगों और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों को बड़ी सुविधा मिली। मार्ग खुलते ही श्रद्धालुओं ने इसका भरपूर लाभ उठाया।

हालांकि, घने बादलों और कम दृश्यता के कारण हेलीकॉप्टर सेवा सुरक्षा की दृष्टि से अस्थायी रूप से बंद रही, लेकिन इससे श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा। हजारों भक्त पारंपरिक मार्ग, ताराकोट मार्ग और बैटरी कार मार्ग से उत्साहपूर्वक भवन की ओर बढ़ते रहे। रोपवे, घोड़ा, पिट्ठू और पालकी जैसी सभी अन्य सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं।

श्राइन बोर्ड ने यात्रा मार्ग पर उत्कृष्ट व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं। बारिश के बाद फिसलन वाले रास्तों को तत्काल साफ कराया गया, जबकि पूरे यात्रा मार्ग पर सफाई, चिकित्सा, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं लगातार उपलब्ध रहीं।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, एसडीआरएफ, आपदा प्रबंधन दल और श्राइन बोर्ड के कर्मचारी चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे। कंट्रोल रूम से यात्रा मार्गों की लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे हर श्रद्धालु सुरक्षित और सहज वातावरण में यात्रा कर रहा है।

आस्था का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। 30 जुलाई को 16,300 श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में हाजिरी लगाई, जबकि 31 जुलाई को शाम 5 बजे तक करीब 12,000 श्रद्धालु कटड़ा से पंजीकरण कर भवन के लिए रवाना हो चुके थे। देर शाम तक श्रद्धालुओं का आगमन निरंतर जारी रहा।

मौसम चाहे जितनी भी परीक्षा ले, माता वैष्णो देवी के भक्तों की अटूट श्रद्धा, प्रशासन की बेहतर व्यवस्थाएं और श्राइन बोर्ड की सतर्कता मिलकर यह संदेश दे रही हैं कि आस्था का यह पावन सफर पूरे उत्साह, सुरक्षा और विश्वास के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है।