बालोद जिले में महतारी वंदन योजना की हितग्राही रोपेंगी उम्मीदों के पौधे* *जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर ने जिलेवासियों से की वृक्षारोपण की अपील*

*बालोद जिले में महतारी वंदन योजना की हितग्राही रोपेंगी उम्मीदों के पौधे*

*जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर ने जिलेवासियों से की वृक्षारोपण की अपील*

*बालोद :-* पर्यावरण संरक्षण और जिले को हरा-भरा बनाने की दिशा में बालोद जिला प्रशासन द्वारा एक अनूठी एवं अभिनव पहल की जा रही है। जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समन्वय से 'महतारी वंदन योजना' की हितग्राही महिलाओं द्वारा संपूर्ण बालोद जिले में वृहद स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को प्रकृति से जोड़ते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित पर्यावरण का निर्माण करना है। इस अवसर पर बालोद जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर तथा पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्री पुष्पेंद्र चंद्राकर ने संयुक्त रूप से समस्त जिलेवासियों, माताओं और बहनों से इस पौधारोपण महाअभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की विशेष अपील की है।

*एक वृक्ष दस पुत्रों के समान : तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर*

जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर ने कहा हमारे शास्त्रों और सनातन परंपरा में कहा गया है एक पौधा लगाना दस पुत्रों को पालने के समान पुण्य कार्य है। महतारी वंदन योजना हमारी बहनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है, अब इसके माध्यम से हम प्रकृति को सहेजने का महान दायित्व भी उठाने जा रहे हैं। माँ ही जीवन को जन्म देती है और वृक्ष जीवन को पोषण देते हैं। पीपल, नीम, बरगद, तुलसी और आवंला जैसे पौधों में देवत्व का वास माना गया है। पीपल भगवान विष्णु का स्वरूप है, तो बरगद साक्षात त्रिदेवों का स्थान। आज जब पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन के संकट से जूझ रहा है, तब हमारी भारतीय पौराणिक मान्यताएँ ही हमें सही राह दिखाती हैं। जब एक माँ पौधा रोपती है, तो वह केवल मिट्टी में बीज नहीं बोती, बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ी की सांसों को सुरक्षित करती है। मेरी बालोद की प्रत्येक महतारी वंदन योजना की हितग्राही बहन से करबद्ध प्रार्थना है कि आप सभी इस अभियान में अपनी-अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें और कम से कम एक पौधा अपनी माँ और अपनी संतान के नाम अवश्य लगाएं व उसकी देखभाल का संकल्प लें।

*प्रकृति हमारी जननी है,इसके बिना मानव सभ्यता के अस्तित्व की कल्पना असंभव है : पुष्पेंद्र चंद्राकर*

पूर्व जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र चंद्राकर ने जिलेवासियों के नाम अपने संदेश में कहा कि प्रकृति केवल जल, जंगल और जमीन का योग नहीं है, यह हमारी जीवनदायिनी शक्ति है। हमारे प्राचीन वैदिक साहित्य में पृथ्वी को माता और स्वयं को उसका पुत्र माना गया है। 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः'। जब प्रकृति संतुलित रहती है, तभी मानव जीवन समृद्ध और खुशहाल बनता है। आज जिला प्रशासन द्वारा महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों के माध्यम से जो वृहद वृक्षारोपण का महाअभियान प्रारंभ किया जा रहा है, वह ऐतिहासिक है। पौराणिक काल से ही वृक्षों का पूजन हमारी संस्कृति का आधार रहा है। हमारे पूर्वजों ने वृक्षों को सहेजा, इसलिए आज हम इस सुंदर धरा पर सांस ले पा रहे हैं। लेकिन आधुनिकता की दौड़ में हमने प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ दिया है।

इस संतुलन को पुनः स्थापित करने का एक ही मार्ग है अधिक से अधिक वृक्षारोपण। यह वृक्षारोपण हमारी आने वाली पीढ़ी के प्रति हमारा नैतिक दायित्व और धर्म है। मैं जिले के प्रत्येक नागरिक, युवा और जनप्रतिनिधि से अपील करता हूँ कि प्रशासन और हमारी मातृशक्ति के इस भागीरथी प्रयास में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हों, पौधे लगाएं और उन्हें विशाल वटवृक्ष बनने तक सींचने का संकल्प लें।

*जन-जन से सहभागिता की अपील*

जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस अभियान में जिले की सभी ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में चरणबद्ध तरीके से छायादार, फलदार और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। इस पहल से जहाँ एक ओर जिले का हरित दायरा बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण में यह मील का पत्थर साबित होगा।